केंद्रीय आम बजट 2021- 22 पर त्वरित प्रतिक्रिया वैश्विक महामारी कोविड-19 और जीडीपी के निगेटिव आंकड़ों के बीच इस दशक का दूसरा केंद्रीय आम बजट 2021 - 22 कुछ खास उत्साहजनक नहीं है। पेट्रोल और डीजल पर एग्री सेस का प्रस्ताव महंगाई बढ़ाने वाला है, आयकर में किसी प्रकार का छूट नहीं देने से मध्यमवर्ग पर दोहरा भार पड़ेगा। बजट में किसानों के ऋण की मात्रा बढ़ाए जाने के अलावा कोई प्रत्यक्ष सहायता की घोषणा नहीं की गई है, जो कि निराशाजनक है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी आधारभूत संरचना के विकास के लिए मात्र 40,000 करोड़ों रुपये की राशि का आवंटन कम है। कुल मिलाकर बजट में हेल्थ केयर और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के निवेश के जरिए रोजगार सृजन पर फोकस किया गया है, जो अपर्याप्त है। लॉकडाउन जैसी स्थिति में असंगठित और प्रवासी मजदूरों के रोजगार कैसे सुरक्षित हो इस पर सरकार तनिक भी ध्यान नहीं दिया है। राजकोषीय घाटा भी करीब 8% रहने की उम्मीद है। पीपीपी मोड में 100 सैनिक स्कूल खोलने की घोषणा की गई है।
