बिहार के समस्तीपुर से दीपक कुमार मोबाइल वाणी के माध्यम से जानकारी दे रहे है कि राज्य में मस्तिष्क बुखार एवं जापानी एवं जापानी बुखार के बढ़ते मरीजों को देखते हुए राज्य सरकार ने बेहतर स्वास्थ्य सेवा बहाल करने की दिशा में कदम उठाये हैं. बिहार में मस्तिष्क ज्वर(एईएस) का मुख्य केंद्र मुज्ज़फरपुर एवं जापानी इन्सेफलाईटिस(जेई) का मुख्य केंद्र गया है. इन दोनों रोगों से निपटने के लिए राज्य सरकार ने विशेष कार्य योजना बना कर इसे चिन्हित जिलों में कार्यान्वित करने पर बल दे रही है. इन रोगों से निपटने के लिए भारत सरकार के मंत्री समूह द्वारा वर्ष 2012 में दिए निर्देश के आलोक में क्षेत्र विशेष एवं लीची पैदावार वाले जिलों को ध्यान में रखते हुए स्टैण्डर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर का निर्माण वर्ष 2013 में तैयार किया गया था एवं इसके ही आधार पर अभी तक एईएस एवं जेई रोगियों का ईलाज किया जा रहा था. लेकिन पुनः विशेषज्ञ चिकित्सकों एवं क्षेत्र से प्राप्त फीडबैक के मुताबिक वर्ष 2018 में इस एसओपी को संशोधित करते हुए सभी जिलों को उपलब्ध कराया गया है. हाइपोगलाईसिमिया से होने वाली मौतों का कारण प्रभावित क्षेत्रों में अत्यधिक गर्मी, आद्रता एवं बारिश का नहीं होना है. मुज्ज़फरपुर जिले में तापमान एवं आद्रता के बढ़ने के साथ ही मस्तिष्क ज्वर के मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी देखने को मिलती है जो बरसात होते ही लगभग समाप्त हो जाती है. जबकि गया में जेई के मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी बरसात के बाद होती है जो जाड़े की शुरुआत पर लगभग ख़त्म हो जाती है. इससे बचाव के लिए राज्य सरकार ने आमजन को सन्देश जारी करते हुए बच्चों को तेज धूप से बचने की सलाह दी है क्योंकि इससे ही डिहाइड्रेशन की शिकायत होती है एवं बच्चों में भूख की कमी के साथ शरीर में पानी भी कम जाता है जिससे हाइपोगलाईसिमिया उत्पन्न होता है. इससे बचने के लिए बच्चों को खाली पेट रात में नहीं सोने देने, सोने के समय नींबू पानी, शक्कर अथवा ओआरएस का घोल पिलाने के संबंध में हिदायत दी गयी है. इसके अतिरिक्त चमकी बुखार की शिकायत होते ही तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में भेजने के लिए भी गुजारिश की गयी है. इसके लिए 102 निःशुल्क एम्बुलेंस से मरीज को स्वास्थ्य केन्द्रों पर भेजने की भी सुविधा बहाल की गयी है.
