झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिलाएं घर के काम,बच्चों की देखभाल एवं पशुपालन के साथ - साथ खेती भी करती हैं।खेती में पूंजी की आवश्यकता पड़ती और अगर पूंजी ना रहे तो कर्ज लिया जाता है।जरुरत पड़ने पर महिला किसान स्वयं सहायता समूह से कर्ज ले सकती है।गहने गिरवी रख सकती हैं। बैंक से लोन ले सकती हैं।महिला खेत के लिए लोन लेती है और उसे चुकाती है।लेकिन जब खेत पर मान्यता की बात आती है,तो कह दिया जाता है कि वह महिला किसान नहीं है। दुर्भाग्यवश यह कहने वाले उसके परिवार के लोग होते हैं।
