झारखंड राज्य के हजारीबाग जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वानिंके मध्यम से यह बताना चाहते हैं कि गैर सरकारी संगठन इस उपेक्षा को दूर करने का प्रयास कर रहे उन्होंने गवाहों को इकट्ठा किया है ।अधिकार सूचना आरटीआई के तहत याचिकाएं दायर की है ।सुधारों की मांग की है और संयुक्त भूमि स्वामित्व के लिए दबाव बनाया है । उनकी वार्षिक रिपोर्ट इस बात का महत्वपूर्ण प्रमाण बन गय है की भारतीय नीतियां महिला किसानों के हितों की रक्षा करने में किस प्रकार विफल रही हैं ।इसके बावजूद दशकों के आंकड़ों और संवाद के भी सरकार मौन बनी हुई हैं और स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है ।तो लोगों को यह पूछना ही होगा कि अब एक महिला सुबह पहले उठकर मीलों पैदल चलती हैं,घंटो झुकी रहती हैं ,धूप और सूखे का सामना करती हैं सिर्फ अपने परिवार का पेट भरने के लिए तो उसे किसान कहलाने के लिए और क्या करना पड़ेगा ।जब तक उनका भूमि अभिलेख पर नहीं लिखा जायेगा तक तक समाधान नहीं निकलेगा ।
