झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि भारत में नारीवाद और महिला शक्ति के कारण आ रहे व्यापक बदलाव के साथ साथ युवा पीढ़ी की सोच और राय में भी बदलाव आ रहा है। प्राचीन काल ऐसी ही भारतीय महिलाएं विवाह के बाद अपने पति का उपनाम अपना लेती आई है। पितृ सत्तात्मक परम्परा में हमेशा से यह मान्यता रही है कि एक महिला की पहचान उसके पति ऐसी जुड़ी होती है और केवल उसका उपनाम अपनाने से ही वो अपने पति के परिवार की सदस बनती है।