झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार मेहता ने मोबाइल वाणी के माध्यम से महिला भूमि अधिकार पर अपनी राय साझा किया।राजकुमार मेहता ने बताया कि श्वेता सिंह द्वारा लिखे गए लेख में संपत्ति के अधिकार को मौलिक अधिकार के रूप में मानने से सम्बंधित विस्तृत जानकारी दी गई है। साथ ही मौलिक अधिकार से संवैधानिक अधिकार के रूप में मान्यता प्राप्त करने तक समपत्ति के अधिकार के विकास का विस्तार पूर्वक वर्णन किया गया है। इसके अतिरिक्त इसमें संविधान सभा द्वारा इस अधिकार को भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) के अंतर्गत मौलिक अधिकार के रूप में शामिल करने के कारणों और सरकार द्वारा इसे हटाकर भारतीय संविधान के अनुच्छेद 300 A के अंतर्गत संवैधानिक अधिकार के रूप में पुनः वर्गीकृत करने के कारणों का भी उल्लेख किया गया है
