झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार मेहता ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि कुछ मामलों में अगर बहु अपने बुजुर्ग सास ससुर को बहुत परेशान करती है जैसे लगातार झगड़े करना तो, अदालतों ने बुजुर्गो के शांतिपूर्ण जीवन के अधिकार को प्राथमिकता देते हुए बहु को घर से निकालने की अनुमति दी है।लेकिन इसके लिए भी उचित प्रक्रिया का पालन किया जाता है। प्रोपर्टी का स्वामित्व अगर पति के माता पिता की निजी संपत्ति है और पति का उस पर कोई कानूनी अधिकार नहीं है तो कोर्ट के पुराने फैसले में बहु के अधिकार सीमित किए गए थे। परन्तु हाल के फैसले में ससुराल वाले बहु को आसानी से घर से नही निकाल सकते हैं। ऐसा करने के लिए उन्हें कानूनी रास्ता अपनाना होगा। बहु को घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत आवास का अधिकार प्राप्त है, जब तक की कोई विशेष न्यायिक स्थिति ना हो।
