झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार मेहता ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि ससुराल वाले बहु को मनमाने ढंग से घर से नहीं निकाल सकते हैं। क्योंकि दिल्ली हाई कोर्ट के हालिया फैसलों के अनुसार शादी के बाद बहु का साझा घर में रहने का अधिकार होता है। भले ही घर उनके पति के माता पिता के नाम पर हो, उन्हें घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत कानूनी प्रक्रिया के बिना जबरन बेदखल नहीं किया जा सकता है।हालांकि कुछ दुर्लभ मामलों में जहाँ बहु बुजुर्ग सास -ससुर को परेशान करती है,अदालत ने उनके निष्कान पर विचार किया है। पर सामान्यतः बहु को सुरक्षित रहने का अधिकार है। बहु के अधिकार जैसे की साझा घर का अधिकार, शादी के बाद जिस घर में महिला रहती है वह उसका साझा घर बन जाता है और उसे वहाँ रहने का कानूनी अधिकार होता है। घरेलू हिंसा अधिनियम यह अधिनियम बहु को साझा घर में रहने का अधिकार देता है और उसे बेदखल होने से बचाता है।
