झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के द्वारा महिलाओं के पक्ष में फैसला दिया है कि दो हजार पचीस के हिन्दू उत्तराधिकारी अधिनियम के तहत बेटियों को भी पिता की पैतृक संपत्ति में बेटों के समान अधिकार दिया गया है क्योंकि यह लैंगिक समानता और भेद भाव को ख़तम करने के सिद्धांत पर आधारित है। अगर यह फैसला नहीं दिया जाता है तो लड़का और लड़की में भेद भाव उत्पन्न हो जाता। इन्ही सब को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है। जिससे समाज में महिलाओं की स्थिति सुधरे और उन्हें कानूनी रूप से बराबरी का दर्जा मिले
