गत 25 नवंबर को सेवानिवृत्त हज़ारीबाग कोर्ट के पेशकार क्रिस्टोफर लकड़ा का शव उनके ही जमीन के तालाब में मिला और वह जमीन वीरेन्द्र मेहता को नर्सरी "झारखंड नर्सरी "के कारोबार के लिए लीज पर दिया हुआ था। परिजनों ने वीरेंद्र मेहता को ही प्राथमिकी में नामजद आरोपी बनाया। मगर आरोपीआज तक पुलिस के गिरफ्त से बाहर है। इतना ही नहीं, लीज पर लिए गए जमीन पर आज भी आरोपी और उसके सहयोगियों द्वारा कारोबार किया जा रहा है। वीरेंद्र मेहता की गिरफ्तारी, हत्या की उच्च स्तरीय जांच, पुलिस प्रशासन की मिलीभगत व मृतक के जमीन हड़पने के मांग को लेकर शुक्रवार को दिवंगत क्रिस्टोफर लकड़ा की धर्मपत्नी माग्रेट लकड़ा, जिलाध्यक्ष झामुमो अल्पसंख्यक मोर्चा के रुचि कुजूर, सुशील ओरिया, अजय टोप्पो आदिवासी छात्र संघ के अजय टोप्पो, रंग ब्लड आदिवासी समाज के मनोज टुडू, सीपीईएम के गणेश कुमार सीटू व प्रवीण मेहता भीम आर्मी व आदिवासी समाज व संगठन और समर्थकों के साथ पुराना समाहरणालय धरना स्थल पर एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया।साथ ही पदयात्रा कर उपायुक्त हज़ारीबाग के माध्यम से मुख्यमंत्री को माग पत्र और ज्ञापन सौंपा। मांग पत्र की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री, राज्यपाल, पुलिस महानिदेशक झारखंड व अध्यक्ष राष्ट्रीय अनुसूचित जाति जनजाति आयोग नई दिल्ली को दिया। धरना कार्यक्रम की अध्यक्षता सुशील ओरिया और मंच संचालन विजय कुजुर ने किया। सयुंक्त संगठनों द्वारा एक दिवसीय धरना कर मुख्य रूप से मांग रखा गया कि नामजद आरोपी वीरेंद्र मेहता और उसके सहयोगियों की अविलंब गिरफ्तारी हो, आरोपी द्वारा संचालित झारखंड नर्सरी हत्या स्थल लीजधारी के कब्जे से मुक्त हो, आरोपी को अनुसूचित जनजाति उत्पीड़न प्रताड़ना एक्ट की धारा लगाया जाए, कोर्रा थाना प्रभारी उत्तम तिवारी व अनुसंधानकर्ता सुदीप पांडेय की उदासीन और आरोपी से मिलीभगत की जांच हो, आरोपी दबंग और भूमाफिया है। इसलिए जांच सी आईडी या फिर सी.बी.आई. से कराया जाए। अपने संदेश में रुचि कुजुर ने कहा कि राज्य अलग होने के बाद भी आदिवासी राज्य में उनको हक और अधिकार की लड़ाई अब भी लड़नी पड़ रही है‌। राज्य सरकार के दिशा निर्देश के बाद भी पुलिस प्रशासन उदासीन, पक्षपातपूर्ण और आदिवासी विरोधी रवैया अपना रही है।