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राम नरेश ठाकुर,जिला मधुबनी के साहरघाट से मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि बाबा बैजनाथ धाम जाने के लिए नेपाल,बिहार और झारखंड से कांवरिया श्रद्धालु सावन के पावन में अपने-अपने कांवर लेकर सुल्तानगंज में स्नान करके पवित्र जल लेकर बैजनाथ धाम प्रस्थान करते है और रास्ते में राज्य सरकार द्वारा 20-25 किलोमीटर पर धर्मशाला की व्यवस्था की गई है लेकिन उस धर्मशाला में भीड़ और काफी गन्दगी होने के कारण कांवरिया खुले मैदान में अपना समय व्यतीत करते है।वही सामाजिक और प्रसाशन के द्वारा श्रद्धालु को किसी प्रकार की कोई सुविधा नहीं मिलती है जबकि सरकार द्वारा कांवरिया को खाने-पीने और रहने की सुविधा होनी चाहिए।

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झारखंड के देवघर स्थित बाबा वैद्यनाथ धाम श्रावणी मेला को लेकर विश्व प्रसिद्ध है।और पुरे सावन महीना में यहां देश भर के विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले शिव भक्तों का ताँता लगा रहता है। ऐसे में हमारा राज्य बिहार से भी बड़े संख्या में कांवरियां जलाभिषेक करने देवघर पहुँचते हैं।और इन श्रद्धालुओं को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार कई तरह की सुविधा मुहैया कराती है। दोस्तों, आप हमे बताएं कि कांवरियों को देवघर स्थित बाबा वैद्यनाथ धाम जाने में समाज एवं सरकार की ओर क्या क्या सुविधा प्रदान की जाती है? और समाज के आम जनों से कावंरियों को किस तरह से सहयोग मिलती है? साथ ही कावंरियों को देवघर पंहुचने में किन किन तरह की असुविधाओं का सामना करना पड़ता है? श्रोताओं , आपके अनुसार कांवरियों को देवघर जाने के क्रम में होने वाली असुविधाओं को कैसे दूर किया जा सकता है ?और कांवरियों को किसी तरह की असुविधा न हो इसके लिए राज्य सरकार और समाज की क्या भूमिका होनी चाहिए ?