कभी बाढ़ तो कभी सुखाड़ से परेशान किसान , अब खेती करने से कतरा रहे है किसान
खरीफ धान के बिचरे रोपने को चाहिए तीन ईंच पानी ।नहरों में पानी नहीं सटेटबोरिंग एक भी चालू नहीं रोपनी हो तो कैसे ।किसानो के कलेजे धडक रहे ।
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भारत की लगभग 70 प्रतिशत आबादी अपने जीवन यापन के लिए कृषि पर निर्भर करती हैं। आजादी के बाद के सभी सरकारों ने कृषि के विकास के लिए कई नीतिओ को लागू किया। और मुझे तो लगता है कि अगर कृषि को देश की अर्थव्यवस्था की धुरी कही जाए , तो कोई गलत नहीं होगा।पिछले 4 दशकों में भारतीय कृषि के उत्पादन में बहुत वृद्धि हुई है। साथ ही खेती में नए नए- किस्म के खाद और बीज की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।चूँकि खेती एक जोखिम भरा काम है ,जिसके लिए सरकार ने किसानो के लिए फसल बीमा योजना , पौधा संरक्षण कार्यक्रम ,राष्ट्रिय बागवानी मिशन जैसे कई योजनाओ को चालू किया। लेकिन इन सब प्रयासों व योजनाओं के क्रियान्वयन के बावजूद वर्तमान में कृषि अर्थव्यवस्था संकट के दौर से गुजर रही है। हम आपसे जानना चाहते है कि, हमें किस तरह की तकनीकियों का प्रयोग करना होगा जिससे फसलों की उत्पादकता बेहतर हो ? क्या परम्परागत फसलों को उगाकर ही किसान समृद्ध हो सकते,? या समय के बदलती माँग व कीमतों के अनुरूप फसल प्रतिरूप में परिवर्तन भी आवश्यक है?क्या फसलों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए किसानों को नई विधियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए ? प्रायप्त मात्रा में फसलों के संग्रहण के लिए शीत गृहो का ना होना भी क्या भारतीय खेती की एक मुख्य चुनौती है ? दोस्तों आपके अनुसार क्या सरकार कृषि उत्पादन को बढ़ाने के लिए किसानो की सहायता कर रही है ? साथ ही आप हमे बताएं कि फसल की उत्पादकता बढ़ाने में किसानों को किन किन चुनौतियों सामना करना पड़ता है ? फसल की उत्पादकता बढ़ाने को लेकर आपकी अनुभव की कहानी, अपनी राय या सुझाव हमारे साथ जरूर साँझा करे
