बनो नई सोच ,बुनो हिंसा मुक्त रिश्ते की आज की कड़ी में हम सुनेंगे महिलाओं के साथ होने वाले दुर्व्यवहार और हिंसा के बारे में।

बनो नई सोच ,बुनो हिंसा मुक्त रिश्ते की आज की कड़ी में हम सुनेंगे महिलाओं के साथ होने वाले दुर्व्यवहार और हिंसा के बारे में।

बनो नई सोच ,बुनो हिंसा मुक्त रिश्ते की आज की कड़ी में हम सुनेंगे यौन हिंसा के बारे में।

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बनो नई सोच ,बुनो हिंसा मुक्त रिश्ते की आज की कड़ी में हम सुनेंगे यौन हिंसा के बारे में।

जिला मधुबनी प्रखंड खुटौना से चंदू जी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है की अल्पायु में विवाह के कई दुष्परिणाम होते है।जैसे कम उम्र में शादी करने से पारिवारिक जिम्मेवारियाँ बढ़ने के कारण बच्चो की पढाई छूट जाती है।लड़कियां समय से पहले गर्भवती हो जाती है जिससे स्थायी रूप से उन्हें शारीरिक और मानसिक तौर पर कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है।15 वर्ष से कम उम्र में लड़की की शादी कर देने से गर्भवती हो जाने पर उनकी मौत की संभावना भी पांच गुना बढ़ जाती है,साथ ही गर्भपात की समस्याएं भी बढ़ जाती है।जनसख्या वृद्धि के कारणों में कम उम्र में होनेवाली शादियों की अहम भूमिका होती है,क्योंकि फैमिली प्लानिंग की समझ उम्र के हिसाब से उनमे कम होती है।जानकारी के आभाव में लड़कियां असुरक्षित यौन संबंधो के कारण एड्स जैसी बीमारियों से भी ग्रसित हो जाती है।मानसिक परिपक्वता के आभाव में शिशु की देखभाल अच्छे से नहीं हो पाती है,साथ ही घरेलु हिंसा भी बढ़ जाती है

जिला मधुबनी से तेज नारायण जी मोबाईल वाणी के माध्यम से बताते हैं कि आज दहेज़ प्रथा हमारे मानव जीवन को शर्मशार कर रहा है। दहेज़ के लिए आये दिन महिलाओं के साथ पड़तड़ना एवं हत्या किया जा रहा है। वहीँ रिश्ते को भी ताड़ ताड़ करता नजर आ रहा है। ये दहेज़ मानवीय गुणों को अविकसित करने के लिए इस परम्परा की शुरआत हो गई है

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बिहार राज्य के जमुई जिला के सिकंदरा प्रखंड से अमित कुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्य समिति के सदस्य मोहम्मद जावेद इकबाल जी से घरेलू उत्पीड़न के सम्बन्ध में बातचीत की।इस दौरान मोहमद जावेद इकबाल जी ने बताया कि महिला हिंसा का सबसे बड़ा कारण है परिवार और समाज में साक्षरता की कमी,जिस कारण महिलाओं के साथ हिंसा किया जाता है।उन्होंने यह भी बताया कि समाज में जागरूकता लाने के लिए अभियान चलाना चाहिए,महिलाओं का एक समूह बना कर उन्हें घर-घर में चिन्हित किया जाना चाहिए,जो पीड़ित महिला है उसका साथ देना चाहिए साथ ही समाज और आस-पड़ोस के लोगों को महिलाओं के साथ हो रही हिंसा को रोकने में सहयोग करना चाहिए।वहीं स्थानीय प्रसाशन का कोई सहयोग नहीं मिलने के कारण महिलाएँ अपनी बात को आगे नहीं उठा पाती हैं।इसके पीछे का भी मुख्य कारण शिक्षा की कमी है।