जिला मधुबनी,प्रखण्ड खुटौना से चंदेश्वर राम चंदू जी मोबाईल वाणी के मध्यम से बता रहे है कि यूँ तो हमारे देश में और समाज में अनेक समस्या चुनौती बनकर खड़ी है।लेकिन इसमें दहेज़ प्रथा एक गंभीर समस्या है। लेकिन यह प्रथा समाज में विकराल रूप धारण करती जा रही है। यह प्रथा सदियों पहले शुरू हुई थी।शुरुवात में इसे धन के नाम से जाना जाता था। इस धन को पिता अपनी बेटी को ससुराल जाते समय अपनी ख़ुशी से दहेज़ के रूप में देता था।लेकिन धीरे-धीरे यह प्रथा समाज के लिए कलंक बन चुकी है।इसे रोकने के लिए सरकार ने 1971ई. में कानून लागु कर दहेज़ को कानूनन अपराध घोषित किया।लेकिन दहेज़ को रोकने के लिए जितने कानून बनते गए उतनी ही यह प्रथा बढ़ती गयी। आलम यह हुआ की आये दिन दहेज़ के लिए बहुओं को जलाने और प्रताड़ित करने की खबरे अखबारों में सुर्खियाँ बनने लगी।विडंबना यह है की दहेज़ के लिए बहु को जलाने के बाद फिर इसी समाज के लोग दहेज़ देकर अपनी बेटी की शादी उसी लड़के से कर देते है जबकि लोगो को ऐसे लड़के का सामाजिक बहिस्कार करना चाहिए।