जिला मधुबनी प्रखंड खजौली से रामाशीष सिंह मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है की बिहार में पंचायत प्रतिनिधियो को अधिक अधिकार देने की बात सिर्फ भाषणों और कागजों तक ही सिमित है।ध्यान देने की बात है की सांसदों और विधायकों की तरह त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के प्रतिनिधि और जन प्रतिनिधि है जिन्हे जनता द्वारा निर्वाचित भी किया जाता है। सांसदों और विधायकों को वेतनभत्ते और आवास की सुविधाएं दी जाती है।इन सुविधाओं को बनाने के लिए क़ानूनी अधिकार भी उन्हें प्राप्त है।जबकि पंचायत प्रतिनिधियों के पास इस प्रकार का कानून बनाने जैसा कोई अधिकार प्राप्त नहीं है।यह सौतेला वय्वहार नहीं तो और क्या है।इस सोच के साथ स्थानीय स्वराज को मजबूत करने का सपना शायद ही पूरा हो पायेगा
