बाजार में मधुमेह की नई-नई दवाएं आ रही हैं पर बीमारी काबू में नहीं आ रही है। ऐसे में वर्ल्ड जर्नल ऑफ डाइबिटीज में प्रकाशित एक ताजा अध्ययन आशा की किरण प्रतीत होता है। इसके अनुसार मधुमेह का उपचार प्रकृति की गोद में छिपा हुआ है और जरूरत सिर्फ गहराई से शोध करने की है। इससे मधुमेह की रोकथाम के मौजूदा प्रयासों को नई दिशा मिल सकती है। एम्स कल्याणी और जिपमेर पांडिचेरी के शोधकर्ताओं की हाल में प्रकाशित शोध रिपोर्ट में पब मेड डाटाबेस को आधार बनाया गया है। इसके अनुसार प्रकृति में 400 औषधीय पौधे मौजूद हैं, जो रक्त में शर्करा की मात्रा को कम करने में कारगर हो सकते हैं। टाइप-2 मधुमेह को नियंत्रण में करने में सक्षम इन पौधों में से अभी तक 21 के बारे में ही प्रभावी अध्ययन और पर्याप्त आंकड़े उपलब्ध हो पाए हैं। जबकि आठ औषधीय पौधों को लेकर आंशिक आंकड़े ही एकत्र हो पाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार एलोपैथिक दवाओं की भांति हर्बल औषध के मामले में भी सक्रिय तत्व की जानकारी का होना जरूरी है। यह भी पता हो कि यह कंपाउंड पौधों के किस हिस्से से प्राप्त होता है। जैसे जड़, छाल, फल, पत्ते, फूल या बीज आदि में। यह हैं 21 पौधे जिन 21 पौधों को लेकर पुख्ता आंकड़े हैं, उनमें करेला, विजयसार, जामुन, जीरा, इसबगोल, तिल, दारुहरिद्रा, एलोवेरा, बेल, मेथी, अदरक, नीम, शकरकंद, आमला, लहसुन, हल्दी, गुड़ुची, दालचीनी, कुंदुकी तथा कटहल शामिल है। इनमें मौजूद सक्रिय तत्व जो शर्करा कम करते हैं उनकी पहचान हा चुकी है और वह पौधे के किस भाग से प्राप्त किए जा सकते है, यह भी पता है। प्राचीन ग्रंथों में जानकारी प्रकृति में अनेक तरह की गुणकारीर औषधियां मौजूद हैं। इनकी जानकारी आयुर्वेद के प्राचीन ग्रंथों में उपलब्ध है। चूंकि भारत में मधुमेह रोगियों की संख्या बहुत ज्यादा है। इसलिए आधुनिक चिकित्सा के तहत इन औषधों पर शोध चिकित्सा क्षेत्र को एक नई उपलब्धि दे सकता है।