एंबुलेंस के लिए 102 नम्बर पर फोन करने पर अनुमंडलीय अस्पताल से दूर दराज क्षेत्रों में भी एंबुलेंस पहुंच जाती है, लेकिन जो इमरजेंसी मरीज होते हैं उनके परिजन एंबुलेंस का इंतजार नहीं करते हैं। वे निजी सवारी से मरीज को लेकर अस्पताल पहुंच जाते हैं। या फिर जो सड़क दुर्घटना में जख्मी हो जाते हैं उन्हें अस्पताल भेजने के लिए एंबुलेंस का इंतजार नहीं करते हैं बल्कि जो निजी सवारी मिलते है उससे मरीजों को अस्पताल भेज दिया जाता है। महंगुआ के राजेश चौधरी, बलुआ के राजेश राम, भवानीपुर के मो. रहमत आदि ने बताया कि सीरियस मरीज को अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस को फोन करने के बाद जितनी देर में यहां पहुंचकर अस्पताल ले जाएंगें उससे कम समय में निजी संसाधन से अस्पताल पहुंचा जा सकता है। क्योंकि इस गांव की दूरी ढाका अस्पताल से करीब पंद्रह किलोमीटर से ज्यादा है। सीरियस मरीज के लिए एंबुलेंस का इंतजार तो किया नहीं जा सकता है क्योंकि देरी होने पर मरीज के साथ परेशानी बढ़ सकती है। इधर, अस्पताल उपाधीक्षक डॉ कर्नल एन के साह ने बताया कि एंबुलेंस के लिए जैसे ही कहीं से सूचना मिलती है उसी क्षण एंबुलेंस वहां के लिए रवाना हो जाती है। रास्ते में जाम की समस्या होने पर थोड़ी सी विलंब हो जाती है। अस्पताल में तीन एंबुलेंस होने से एंबुलेंस को भेजने में समस्या नहीं होती है। सरकारी एंबुलेंस के भरोसे जा सकती है मरीजों की जान,नहीं लगता सरकारी नंबरआदापुर। अगर सरकारी एंबुलेंस के भरोसे कोई रहे तो समय से अस्पताल पहुंचना मुश्किल हो जायेगा और मरीज की स्थिति बिगड़ सकती है। यह कहना है सुदूर ग्रामीण गांव लतियाही के सुरेश कुमार का। बलुआ के हरिनंदन कहते हैं कि सरकारी नंबर पर फोन लगना ही कठिन है। सिरिसिया माल के प्रदीप बैठा कहते हैं कि सरकारी नंबर 102 और 112 से ही अधिकांश लोग अनभिज्ञ हैं,जिन्हें पता है वे मरीज की स्थिति देख पहले से ही नंबर डायल करना शुरू कर देते हैं और नंबर लग जाने के बाद आदापुर सीएचसी का एंबुलेंस पहुंच जाता है। बिसुनपुरवा के श्यामाकांत कहते हैं कि इमरजेंसी हो तो सरकारी नंबर जल्दी नहीं लगता,जिसके वजह से प्राइवेट गाड़ियों का ही सहारा लेना पड़ता है। सीएचसी में तीन एंबुलेंस उपलब्ध है। जो पीपीपी मोड में संचालित है। इसमें दो एंबुलेंस अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधा से लैस है। एंबुलेंस कर्मी अमित कुमार बताते हैं कि जैसे ही सूचना मिलती है प्रखंड के किसी भी कोने में एंबुलेंस बीस से पच्चीस मिनट में पहुंच जाता है। सीएचसी प्रभारी डॉ.संतोष कुमार बताते हैं कि अधिकांश ग्रामीणों को सरकारी नंबर ही नहीं पता है।इस वजह से भी उन्हें एंबुलेंस सेवा नहीं मिल
