जिला के अधिकांश लोगों को नहीं मालूम है कि 112 पर डायल करने पर एम्बुलेन्स भी मिलता है और फायर की सुविधा भी। नतीजतन 102 पर ही अधिकांश लोग डायल कर एम्बुलेन्स मंगवाते हैं। हालांकि कुछ लोगों की यह भी शिकायत है कि शाम के बाद 102 नम्बर ज्यादा बिजी आता है तो 112 पर भी रिस्पॉन्स जल्दी नहीं मिलता है। मगर बात ही जाने पर एम्बुलेन्स की अगर जरूरत है तो फायर बिग्रेड की गाड़ी भी आ जाती है। मिली जानकारी के अनुसार सरकार की ओर से बहाल सुविधा के तहत विशेष घटना मसलन अगलगी व अन्य गम्भीर घटना के लिये 102 के अलावे 112 नम्बर पर डायल करने पर एम्बुलेन्स के साथ फायर की गाड़ी ही स्थल पर भेजी जाती है। 102 पर सिर्फ एम्बुलेन्स ही भेजा जाता है। 112 पर डायल करने पर दोनों सुविधा मिलती है। बताते हैं कि जिला में सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सहित जेई प्रभावित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर अलग से एम्बुलेन्स दिया गया है। जिला में इसकी कुल संख्या 78 है।इसके अलावे शव ढोने वाली एम्बुलेन्स की संख्या 3 है। सब कैनेक्शन 102 एम्बुलेन्स है। 112 पर भी डायल करने पर 102 को फोन कर भेजा जाता है।112 नम्बर का कनेक्शन फायर व 102 एम्बुलेन्स से रहता है।शहर के व्यवसाई राजू कुमार ने बताया कि उनके प्रतिष्ठान में शार्ट सर्किट से आग लगा तो 112 पर डायल किये तो कुछ लेट सही मगर एम्बुलेन्स व फायर बिग्रेड गाड़ी पहुंच गया था। 102 पर लगाये तो बिजी आ रहा था। ऐसा ही आरोप कई आशा कार्यकर्ता का है। उनका कहना है कि इमरजेंसी में प्रसुता का प्रसव के लिए 102 पर फोन करने पर रात में जल्दी नहीं पकड़ता है। नतीजतन कभी कभी निजी वाहन से प्रसव के लिए लाना पड़ता है। जब अस्पताल पहुंच जाते हैं तो 102 से कॉल आता है कि आपका फोन आया था। विदित हो कि एम्बुलेन्स का संचालन एनजीओ के द्वारा किया जाता है।
