जिले के दलित बस्ती में खोले गये तीन शहरी प्राथमिक चिकित्सा केंद्रों पर आउटडोर में मरीजों को नहीं देखा जा रहा। पिछले महीने मात्र 15 से 16 मरीज प्रति प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र देखे गए हैं। जबकि प्रतिमाह टारगेट 3 हजार मरीज को देखने का है। इसको लेकर राज्य स्वास्थ्य समिति के निदेशक ने सिविल सर्जन से जबाब तलब किया है। साथ ही व्यवस्था में सुधार लाने का निर्देश जारी किया है। कमोबेश ऐसा ही आलम टेलीमेडिसिन का होता जा रहा है। मोतिहारी व रक्सौल में खुला है शहरी प्राथमिक चिकित्सा केंद्र स्वास्थ्य मिशन के तहत जिला के दलित बस्ती छतौनी, बरियारपुर व रक्सौल में शहरी प्राथमिक चिकित्सा केंद्र खोला गया है। इसका उद्देश्य दलित कमजोर वर्ग सहित आम लोगों को चिकत्सीय सुविधा देने का है। महीने में कम से कम इस केंद्र के आउटडोर में प्रति केंद्र तीन हजार मरीज को देखना है। मगर सरकार को भेजे गये रिपोर्ट के अनुसार इन केंद्रों पर 15 से 16 मरीज देखे गए हैं। जिसको लेकर राज्य स्वास्थ्य समिति के निदेशक नराजगी जताते हुए व्यवस्था में सुधार लाने का निर्देश जारी किया है। टेलीमिडिसिन से इलाज में भी बरती जा रही उदासीनता बताते हैं कि मरीजों को गांव स्तर तक चिकित्सीय सुविद्या देने के लिए टेलीमेडिसिन सुविधा दी गयी है। जिला के सभी पीएचसी, अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र, अनुमंडलीय अस्पताल, स्वास्थ्य उप केन्द्र को टेलीमेडिसिन से जोड़ा गया है। सप्ताह में दो दिन यह सुविधा मरीज को देना है। प्रत्येक प्राथमिक चिकित्सा केंद्र, अनुमंडलीय अस्पताल, सदर अस्पताल से एक एक डाक्टर को टेलीमेडिसिन पर कम से कम 5 मरीज को बीमारी का इलाज करना है। जबकि पिछले शनिवार को जिले में टेलीमेडिसिन से मात्र180 मरीज ही देखे गए। जबकि रोस्टर के अनुसार करीब 150 डाक्टर की डॺूटी है। इसके लेकर भी नाराजगी जताई गई है।
