मशाला, सरसों तेल और बेसन सहित पनीर और लड्डू की जांच के लिये हर साल दीपावली व छठ पर्व के अवसर पर सैम्पल लिया जाता है । जांच में गड़बड़ी आने पर एडीएम के यहां विभाग के द्वारा केस किया जाता है। सुनवाई के बाद लिए गए निर्णय में अब तक तीन मिलावट करने वाले व्यवसायी पर अर्थ दंड लगाया गया है। जबकि वर्ष 2019 में सीजीएम के कोर्ट में करीब एक दर्ज़न मुकदमा हुआ जिसमें आधा दर्जन केस में अर्थ दंड किया गया। बाकी मामले चल रहे हैं। बताते हैं कि मिलावटी खाद्य पदार्थ की जांच के लिये जिला में मात्र एक खाद्य संरक्षा अधिकारी हैं जो दूसरे जिले के भी प्रभार में हैं। नतीजतन जिले में खानापूर्ति के लिये जांच को लेकर नमूना लिया जाता है।जिसकी रिपोर्ट भी महीनों बाद आती है। इसके कारण खाद्य पदार्थ में मिलावट करनेवाले व्यवसायियों की पौ बारह रहती है। विभागीय सूत्रों केअनुसार जिले में लिए गए सैम्पल में सबसे अधिक मशाला, बेसन व कुछ मिठाई में मिलावट पाई गई है।इस मिलावट में कुछ शहर के चमक दमक वाले मिठाई की दुकान के अलावा किराना का दुकान भी हैं। मगर अधिकारी की कमी के कारण जांच नहीं हो पाती है। पर्व के अवसर पर खानापूर्ति होती आयी है।