नहीं रहे योग्य पंडित ,कई भाषाओं से विद्वान एवं समाजसेवी ,गरीबों के मसीहा पुरनहिया। प्रखंड क्षेत्र के बाराही मोहन वार्ड 5 निवासी स्वर्गीय सूरज मिश्रा के पुत्र पंडित दिनेश मिश्र उनका देहांत गुरुवार को अचानक हो गई बराही मोहन के सरपंच चंदेश्वर सिंह ने बताया कि योग्य पंडित शिक्षक समाज सेवी कई भाषाओं जैसे उर्दू, हिंदी, इंग्लिश ,संस्कृत ,वेद वेदांत, सहित कई भाषाओं से परिपूर्ण थे। वह तीन भाइयों में बड़े पुत्र थे 95-97 के उम्र में उनका देहांत हो गया ।वह अपने पीछे दो लड़का एक लड़की छोड़कर चलें गया। व कई नए प्रतिमान कीर्तिमान को भारत माता को न्योछावर कर पंचतत्व में विलीन हो गए। सरपंच श्री सिंह ने बताया कि वो राजनैतिक में काफी सक्रिय रहे एवं महात्मा गांधी के सिद्धांत पूरक थे एवं शिक्षक रहते हुए बराही मोहन में मध्य विद्यालय शिक्षक के रूप में बतौर समाज के प्रति विद्वता और सामाजिकता से वह गांव को संस्कारित किया था ।उनके निधन से अपूरणीय क्षति मानी जाती है वह एक ऐसे देवकुल महान पुरुष के निधन से ऐसा लग रहा है जैसे सगन छांया का वटवृक्ष धारा भरभरा कर गिर गया है एवं पंडित दिनेश मिश्र का सानिध्य समाज के हर वर्ग एवं लोगों के बीच छाया छोड़कर चले गए जो उनका स्वभाव इतना मृदुल, हंसमुख ,और मिलनसार था ।कि सामान्य एवं सर्व साधारण व्यक्ति भी उनके समीप बैठ कर गर्व का अनुभव करता था। गांव की माने तो श्री मिश्र पहले समय में बेरोजगार नवयुवकों में आशा की किरण संचार करने की उम्र में अद्भुत कला थी जो कोई व्यक्ति आर्थिक तंगी एवं डिप्रेशन से अपने विलक्षण वाकपटुता ओजस्वी वाणी प्रखर बुद्धि से क्षण में तनाव को दूर कर देते थे ।माने तो उन्होंने राजनीतिक परिदृश्य से जब आपातकाल लागू हुआ तो तो बनाए राजनीति से दूरी नेहरू जी शास्त्री इंदिरा जी के समय तक के सक्रिय राजनीति में भी रहे ।एवं इंदिरा गांधी द्वारा आपातकाल लागू किए जाने के बाद वह धीरे-धीरे सक्रिय राजनीति से दूर हो गए।
