जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में गुहार लगाने वाले उपभोक्ताओं को बेहतर सुविधा मिल सकेगी इसे लेकर मध्यस्थता केंद्र का निर्माण कार्य कराया जा रहा है। आयोग के अध्यक्ष और न्यायाधीश अशोक कुमार ने केंद्र का शिलान्यास किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि प्रदेश में 16 मध्यस्थता केंद्र बन रहे हैं इसमें आठ बन कर तैयार हो गए हैं।
रायबरेली जिले के डीह थाना क्षेत्र के पूरे दीना गांव के रहने वाले कृष्ण कुमार थाने में तहरीर देकर न्याय की गुहार लगाई है पीड़ित ने बताया कि गांव की ही रहने वाले सोहन और श्रीकांत ने उसकी दीवार गिरा दी है जब विरोध किया तब गाली गलौज करते हुए जाम से मारने की धमकी दी है
एशिया स्पोर्ट क्लब में ताई कमांडो का बेल्ट टेस्ट कराया गया इसमें 28 खिलाड़ियों ने दमखम दिखाया इस दौरान सभी प्रतिभागी खिलाड़ियों की प्रतिभा परखी गई। तकनीकी पहलुओं के साथ ही आत्मरक्षा का परीक्षण किया गया
फाइलेरिया पेशेंट प्लेटफ़ॉर्म के सदस्य फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन करने के लिए कर रहे सहयोग उन्नाव, 16 फरवरी 2024 राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत जनपद के 10 ब्लॉक में 10 से 28 फरवरी तक सर्वजन दवा सेवन अभियान चल रहा है । इसी क्रम में स्वास्थ्य कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन करा रहे हैं । मंगलवार को ब्लॉक अचलगंज के ग्राम बदुवाखेडा की आशा कार्यकर्ता राजकुमारी जब गाँव में दवा खिलाने गई तो वहाँ पर कुछ लोगों ने फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन करने से मना कर दिया । अगले दिन राजकुमारी फाइलेरिया पेशेंट प्लेटफार्म के सदस्य मुकेश को अपने साथ लेकर फिर से गाँव में गई और गाँव में मुकेश ने फाइलेरिया प्रभावित पैर को दिखाते हुए सभी लोगों को समझाया कि यदि आप दवा खा लेंगे तो फाइलेरिया जैसे गंभीर रोग से बचे रहेंगे। दवा सुरक्षित है और इस दवा को खाने के बाद कोई भी दिक्कत नहीं होती | यदि आपके अंदर फाइलेरिया के परजीवी हैं तभी आपको उल्टी, सिर भारी होना, चकत्ते आदि लक्षण हो सकते हैं । इससे आप परेशान ना हों बल्कि इसका मतलब है कि आपके शरीर में फाइलेरिया के परजीवी थे और दवा का सेवन करने के बाद वह परजीवी मर गए । परजीवियों के मरने के परिणामस्वरूप यह प्रीतिक्रिया हुई है । मुकेश ने समझाया कि अन्य जो लोग इस समय नहीं है वह लोग आशा कार्यकर्ता से मिलकर दवा ले लें और उसका सेवन करें । मुकेश के समझाने का परिणाम हुया कि सात लोगों ने फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन किया । मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. सत्यप्रकाश ने लोगों से अपील की है कि फाइलेरियारोधी दवा का सेवन करें । दवा पूरी तरह से सुरक्षित है | फाइलेरिया ऐसी बीमारी है जिसका कोई इलाज नहीं है । इससे बचाव ही प्रमुख विकल्प है । इस बीमारी का केवल प्रबंधन ही किया जा सकता है । इसलिए स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का सहयोग करें । जब भी वह दवा खिलाने आएं तो दवा का सेवन अवश्य करें । मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि आईडीए अभियान के तहत लगातार तीन साल तक फाइलेरियारोधी दवा का सेवन करने से इस बीमारी से बचा जा सकता है । राष्ट्रीय वेक्टरजनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डा. जे.आर. सिंहने कहा कि यह दवा गर्भवती, दो साल से कम आयु के बच्चों और अति गंभीर बीमारी से पीड़ित को छोड़कर सभी को खानी है । फाइलेरिया से बचाव के लिये जरूरी है कि फाइलेरियारोधी दवा का सेवन करें और मच्छरों से बचें । जिला मलेरिया अधिकारी रमेश् यादव ने बताया कि आईडए अभियान के शुरू के चार दिनों में 4.5 लाख से अधिक लोगों ने फाइलेरियारोधी दवा का सेवन किया है । अभियान में विश्व स्वास्थ्य संगठन सहित स्वयंसेवी संस्थाएं सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च(सीफॉर), पीसीआई और पाथ सहयोग कर रही हैं । इसके साथ ही जनपद के 10 ब्लॉक में पेशंट नेटवर्क के सदस्य समुदाय को फाइलेरियारोधी दवा का सेवन करने के लिए जागरूक कर रहे हैं ।
फाइलेरियारोधी दवा खाएं, दवा सुरक्षित है : फाइलेरिया मरीज अमेठी, 16 फरवरी 2024 हमने दवा नहीं खाई तो आज इस मुसीबत मे पड़े हैं | चलने फिरने में दिक्कत है, परिवार पर बोझ हैं | हमने फाइलेरिया से बचाव की दवा नहीं खाई और आज फाइलेरिया से पीड़ित हैं | कम से कम तुम जन तो कुछ सीखो और फाइलेरिया से बचाव की दवा खाओ | आज जब दरवाजे पर लोग दवा खिलाने आए हैं तो काहे नहीं दवा खाए रहे हो | फाइलेरिया से बचाव की दवा खाओ और इस बीमारी से बचो | यह दवा पूरी तरह सुरक्षित है | यह बातें जामो ब्लॉक के गांव कटारी निवासी फाइलेरिया पेशेंट प्लेटफार्म के सदस्य 62 वर्षीय चंद्रिका प्रसाद ने ग्रामीण रजनी के घरवालों से कहीं | इन शब्दों का यह प्रभाव पड़ा कि रजनी सहित घर के कुल छह सदस्यों ने फाइलेरियारोधी दवा का सेवन किया | क्षेत्र की आशा कार्यकर्ता प्रीति कटारी बताती हैं कि मंगलवार को रजनी के परिवार के लोगों ने फाइलेरिया की दवा का सेवन करने से मना कर दिया था | अगले दिन बुधवार को हम चंद्रिका प्रसाद को लेकर रजनी के घर गए और चंद्रिका प्रसाद ने उपरोक्त बातों को बताया जिसके बाद लोगों ने फाइलेरियारोधी दवा का सेवन किया | इस बार अभियान में फाइलेरिया प्लेटफ़ॉर्म के सदस्य बहुत मदद कर रहे हैं | जिसका परिणाम है कि कुछ लोग विशेषकर नौजवान तो फाइलेरिया रोधी दवा मांग कर खा रहे हैं | फाइलेरिया प्लेटफ़ॉर्म के लोगों ने सर्वजन दवा सेवन अभियान(आईडीए) के शुरू होने से पहले ही लोगों को इसकी जानकारी देनी शुरू कर दी थी और अब अभियान के दौरान भी यह हमारे साथ घर-घर जा रहे हैं | मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. अंशुमान सिंह ने कहा कि जनपद में 10 से 28 फरवरी तक आईडीए अभियान चल रहा है जिसके तहत लोगों को घर-घर जाकर और बूथ के माध्यम से फाइलेरिया रोधी दवा आइवरमेक्टिन, डाईइथाइल कार्बामजीन और एल्बेंडाजोल खिलाई जा रही है | लोग अभियान में बढ़कर हिस्सा ले रहे हैं | जिसका यह परिणाम हुआ है कि अभियान के शुरू के चार दिनों में 22.16 लाख जनसंख्या के सापेक्ष पाँच लाख से अधिक लोगों ने फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन किया है | इस अभियान में स्वयंसेवी संस्था पीसीआई और सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीफॉर) सामुदायिक जागरूकता की गतिविधियां कर रहे हैं जिसके तहत विद्यालयों, पंचायत भवनों और कोटेदार की दुकानों पर गतिविधियां की जा रही हैं | इसके साथ ही विश्व स्वास्थ्य संगठन और पाथ संस्था तकनीकी सहयोग कर रही है | इसके अलावा पेशेंट प्लेटफॉर्म के सदस्य लोगों को फाइलेरियारोधी दवा खाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं |
स्वास्थ्य सचिव सहित कई अधिकारियों ने किया फाइलेरियारोधी दवा का सेवन लखनऊ, 16 फरवरी 2024। राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत जनपद में 10 से 28 फरवरी तक सर्वजन दवा सेवन अभियान चल रहा है। इसी क्रम में स्वास्थ्य सचिव रंजन कुमार, विशेष सचिव विनोद कुमार, पांच समीक्षा अधिकारी और अपर निदेशक, डा. एमके सिंह ने फाइलेरियारोधी दवा आइवरमेक्टिन, डाईइथाइल कार्बामजीन और एल्बेंडाजोल का सेवन किया। इन दवाओं का सेवन स्वयं जिला मलेरिया अधिकारी डा. रितु श्रीवास्तव ने करवाया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. मनोज अग्रवाल ने लोगों से अपील की है कि लोग फाइलेरियारोधी दवा का सेवन करें। इन दवाओं के सेवन से ही फाइलेरिया से बचा जा सकता है। फाइलेरिया से बचाव की दवाएं पूरी तरह से सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि फाइलेरिया ऐसी बीमारी है जिसका कोई इलाज नहीं है। इससे बचाव ही प्रमुख विकल्प है। इस बीमारी का केवल प्रबंधन ही किया जा सकता है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि आईडीए अभियान के तहत लगातार तीन साल तक फाइलेरियारोधी दवा का सेवन करने से इस बीमारी से बचा जा सकता है। राष्ट्रीय वेक्टरजनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डाॅ. गोपीलाल ने कहा कि यह दवा गर्भवती, दो साल से कम आयु के बच्चों और अति गंभीर बीमारी से पीड़ित को छोड़कर सभी को खानी है। फाइलेरिया से बचाव के लिये जरूरी है कि फाइलेरियारोधी दवा का सेवन करें और मच्छरों से बचें। जिला मलेरिया अधिकारी ने बताया कि उच्चाधिकारियों ने अभियान में सहभाग करते हुए फाइलेरियारोधी दवा का सेवन किया और अपने-अपने कार्यालयों में अधीनस्थों से दवा का सेवन करने की अपील की। उन्होंने बताया कि अभियान में विश्व स्वास्थ्य संगठन, सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीफॉर), पीसीआई और पाथ संस्थाएं सहयोग कर रही हैं। इसके साथ ही जनपद के पांच ब्लॉक बक्शी का तालाब, मोहनलालगंज, माल, सरोजिनी नगर और काकोरी में पेशंट नेटवर्क के सदस्य समुदाय को फाइलेरियारोधी दवा का सेवन करने के लिए जागरूक कर रहे हैं।
बच्चे के जीवन के शुरुआती 42 दिन बेहद महत्वपूर्ण स्वास्थ्य अधिकारियों को दिया गया आशा मॉड्यूल छह और सात का प्रशिक्षण प्रशिक्षण प्राप्त सभी अधिकारी आशा कार्यकर्ताओं को करेंगे प्रशिक्षित लखनऊ, 16 फरवरी 2024। किसी भी नवजात के जीवन के शुरुआती 42 दिन बहुत महत्वपूर्ण होते हैं, इस दौरान उसकी विशेष देखभाल की जरूरत होती है। इस अवधि में खतरों के लक्षणों की पहचान कर समय से चिकित्सीय जांच और इलाज कराकर किसी भी अनहोनी से बचा जा सकता है। इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखकर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा गृह आधारित नवजात देखभाल कार्यक्रम (एचबीएनसी) चलाया जा रहा है। यह बात स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण प्रशिक्षण केंद्र के प्रधानाचार्य डा. अजीत कुमार गुप्ता ने गुरुवार को इंदिरा नगर स्थित प्रशिक्षण केंद्र में बाल स्वास्थ्य पर आधारित 15 दिवसीय मंडलीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन अवसर पर कहीं । उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण में गृह आधारित नवजात देखभाल (एचबीएनसी) और होम बेस्ड केयर फॉर यंग चाइल्ड (एचबीवाईसी) यानि गृह आधारित छोटे बच्चों की देखभाल कार्यक्रम पर जानकारी देने के साथ ही घरेलू हिंसा पर भी जानकारी दी गई | प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद यह प्रशिक्षक अपने-अपने जिलों में आशा कार्यकर्ताओं को नवजात और बच्चों की देखभाल,पोषण और घरेलू हिंसा रोकने के लिए प्रशिक्षण देंगे | कोर्स संचालक डा. गिरिजेश नंदिनी ने बताया कि एचबीएनसी के तहत आशा कार्यकर्ता बच्चे के जन्म के बाद 42 दिन के भीतर छह/सात बार संबंधित घर का भ्रमण करती हैं | इस कार्यक्रम का उद्देश्य सभी नवजात को अनिवार्य सुविधाएं उपलब्ध कराना, समय पूर्व पैदा होने वाले और जन्म के समय कम वजन वाले बच्चों की शीघ्र पहचान कर उनकी देखभाल करना, नवजात की बीमारी का शीघ्र पता लगाकर समुचित देखभाल एवं रेफ़र करना, परिवार को आदर्श व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित एवं सहयोग करना तथा माँ के अंदर अपने नवजात के स्वास्थ्य की सुरक्षा करने का आत्मविश्वास एवं दक्षता का विकास करना है | एचबीएनसी कार्यक्रम का विस्तार करते हुए तीन से 15 माह के बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण को बढ़ावा देने, बाल रुग्णता और मृत्यु दर को कम करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और पोषण अभियान के एक हिस्से के रूप में साल 2018 में एचबीवाईसी कार्यक्रम शुरू किया गया था | इसके तहत आशा कार्यकर्ता बच्चे के जन्म से लेकर 15वें महीने तक कुल पाँच गृह भ्रमण करती हैं | 15 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला में लखनऊ मण्डल के चिकित्सा अधिकारियों, स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारियों तथा गैर सरकारी संगठन के सदस्यों को प्रशिक्षण दिया गया | इनसेट --- गृह भ्रमण के दौरान आशा के कार्य --- एचबीवाईसी के तहत गृह भ्रमण के दौरान आशा कार्यकर्ता बच्चे की माँ और परिवार के सदस्यों को छह माह तक केवल स्तनपान कराना, छह माह के बाद स्तनपान के साथ ऊपरी आहार शुरू करने की सलाह देना और इसे सुनिश्चित भी कराना, माँ को संतुलित एवं पौष्टिक आहार का सेवन करने की सलाह देना, बच्चे में स्वास्थ्य और पोषण संबंधी समस्याओं को पहचानना तथा इन समस्याओं का प्रबंधन करने में सहायता करना, मातृत्व एवं शिशु सुरक्षा (एमसीपी) कार्ड का उपयोग करके बच्चों की वृद्धि और विकास में देरी की शीघ्र पहचान की सुविधा ,बच्चे का समय से टीकाकरण करवाना, आयरन फोलिक एसिड सिरप के सेवन की सलाह देना, डायरिया के समय ओआरएस के सेवन करने की सलाह देना, माँ और परिवार के सदस्यों को साबुन और पानी से हाथ धोने की सलाह देना | बचपन में होने वाली सामान्य बीमारियों की रोकथाम एवं प्रबंधन में सहायता करना | जटिलताओं का प्रबंधन करना एवं आगे के इलाज के लिए उच्च स्वास्थ्य केंद्र रेफ़र करना | इसके साथ ही आशा कार्यकर्ता इसकी भी निगरानी करती हैं कि आयु के अनुसार बच्चा खेल रहा है और उसका अन्य के साथ संचार उपयुक्त है | आशा कार्यकर्ता को प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है | इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में कुल 21 प्रतिभागियों ने प्रतिभाग किया। प्रशिक्षण केंद्र के प्रधानाचार्य ने सभी को प्रमाणपत्र प्रदान किये | इस मौके पर डा. जीएस सिंह, प्रशिक्षक डा. एस.के. सक्सेना, अनीता पांडे, विनय एवं पवन कुमार मौजूद रहे |
हंसने-हंसाने से इंसान खुश रहता है, जिससे मानसिक तनाव, चिंता और डिप्रेशन कम होता है। दोस्तों, उत्तम स्वास्थ्य के लिए हंसी-मज़ाक बहुत ज़रूरी है। इसीलिए मोबाइल वाणी आपके लिए लेकर आया है कुछ मजेदार चुटकुले, जिन्हें सुनकर आप अपनी हंसी रोक नहीं पाएंगे।अगर आपके पास है कोई मज़ेदार चुटकुला, तो रिकॉर्ड करें मोबाइल वाणी पर, फ़ोन में नंबर 3 का बटन दबाकर और जीतें आकर्षक इनाम।
घरेलू हिंसा सभ्य समाज का एक कड़वा सच है।आज भले ही महिला आयोग की वेबसाइट पर आंकड़े कुछ भी हो जबकि वास्तविकता में महिलाओं पर होने वाली घरेलु हिंसा की संख्या कई गुना अधिक है। अगर कुछ महिलाएँ आवाज़़ उठाती भी हैं तो कई बार पुलिस ऐसे मामलों को पंजीकृत करने में टालमटोल करती है क्योंकि पुलिस को भी लगता है कि पति द्वारा कभी गुस्से में पत्नी की पिटाई कर देना या पिता और भाई द्वारा घर की महिलाओं को नियंत्रित करना एक सामान्य सी बात है। और घर टूटने की वजह से और समाज के डर से बहुत सारी महिलाएं घरेलु हिंसा की शिकायत दर्ज नहीं करतीं। उन्हें ऐसा करने के लिए जो सपोर्ट सिस्टम चाहिए वह हमारी सरकार और हमारी न्याय व्यवस्था अभी तक बना नहीं पाई है।बाकि वो बात अलग है कि हम महिलाओं को पूजते ही आए है और उन्हें महान बनाने का पाठ दूसरों को सुनाते आ रहे है। आप हमें बताएं कि *-----महिलाओं के साथ वाली घरेलू हिंसा का मूल कारण क्या है ? *-----घरेलू हिंसा को रोकने के लिए हमें अपने स्तर पर क्या करना चाहिए? *-----और आपने अपने आसपास घरेलू हिंसा होती देखी तो क्या किया?
सुनिए डॉक्टर स्नेहा माथुर की संघर्षमय लेकिन प्रेरक कहानी और जानिए कैसे उन्होंने भारतीय समाज और परिवारों में फैली बुराइयों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई! सुनिए उनका संघर्ष और जीत, धारावाहिक 'मैं कुछ भी कर सकती हूं' में।
