दोस्तों, हमारे यह 2 तरह के देश बसते है। एक शहर , जिसे हम इंडिया कहते है और दूसरा ग्रामीण जो भारत है और इसी भारत में देश की लगभग आधी से ज्यादा आबादी रहती है। और उस आबादी में आज भी हम महिला को नाम से नहीं जानते। कोई महिला पिंटू की माँ है , कोई मनोज की पत्नी, कोई फलाने घर की बड़ी या छोटी बहु है , कोई संजय की बहन, तो कोई फलाने गाँव वाली, जहाँ उन्हें उनके मायके के गाँव के नाम से जाना जाता है। हम महिलाओ को आज भी ऐसे ही पुकारते है और अपने आप को समाज में मॉडर्न दिखने की रीती का निर्वाह कर लेते है। समाज में महिलाओं की पहचान का महत्व और उनकी स्थिति को समझने की आवश्यकता के बावजूद, यह बहुत दुःख कि बात है आधुनिक समय में भी महिलाओं की पहचान गुम हो रही है। तो दोस्तों, आप हमें बताइए कि *-----आप इस मसले को लेकर क्या सोचते है ? *-----आपके अनुसार से औरतों को आगे लाने के लिए हमें किस तरह के प्रयास करने की ज़रूरत है *-----साथ ही, आप औरतों को किस नाम से जानते है ?

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ" के नारे से रंगी हुई लॉरी, टेम्पो या ऑटो रिक्शा आज एक आम दृश्य है. पर नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च द्वारा 2020 में 14 राज्यों में किए गए एक अध्ययन में कहा गया है कि योजना ने अपने लक्ष्यों की "प्रभावी और समय पर" निगरानी नहीं की। साल 2017 में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में हरियाणा में "धन के हेराफेरी" के भी प्रमाण प्रस्तुत किए। अपनी रिपोर्ट में कहा कि बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ स्लोगन छपे लैपटॉप बैग और मग खरीदे गए, जिसका प्रावधान ही नहीं था। साल 2016 की एक और रिपोर्ट में पाया गया कि केंद्रीय बजट रिलीज़ में देरी और पंजाब में धन का उपयोग, राज्य में योजना के संभावित प्रभावी कार्यान्वयन से समझौता है।

सुनिए डॉक्टर स्नेहा माथुर की संघर्षमय लेकिन प्रेरक कहानी और जानिए कैसे उन्होंने भारतीय समाज और परिवारों में फैली बुराइयों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई! सुनिए उनका संघर्ष और जीत, धारावाहिक 'मैं कुछ भी कर सकती हूं' में।

भारत में शादी के मौकों पर लेन-देन यानी दहेज की प्रथा आदिकाल से चली आ रही है. पहले यह वधू पक्ष की सहमति से उपहार के तौर पर दिया जाता था। लेकिन हाल के वर्षों में यह एक सौदा और शादी की अनिवार्य शर्त बन गया है। विश्व बैंक की अर्थशास्त्री एस अनुकृति, निशीथ प्रकाश और सुंगोह क्वोन की टीम ने 1960 से लेकर 2008 के दौरान ग्रामीण इलाके में हुई 40 हजार शादियों के अध्ययन में पाया कि 95 फीसदी शादियों में दहेज दिया गया. बावजूद इसके कि वर्ष 1961 से ही भारत में दहेज को गैर-कानूनी घोषित किया जा चुका है. यह शोध भारत के 17 राज्यों पर आधारित है. इसमें ग्रामीण भारत पर ही ध्यान केंद्रित किया गया है जहां भारत की बहुसंख्यक आबादी रहती है.दोस्तों आप हमें बताइए कि *----- दहेज प्रथा को लेकर आप क्या सोचते है ? और इसकी मुख्य वजह क्या है ? *----- समाज में दहेज़ प्रथा रोकने को लेकर हमें किस तरह के प्रयास करने की ज़रूरत है ? *----- और क्यों आज भी हमारे समाज में दहेज़ जैसी कुप्रथा मौजूद है ?

Transcript Unavailable.

मंत्री स्मृति ईरानी ने अमेठी की 'सुकन्याओं' को सशक्त बनाने के लिए दो बोइंग साक्षरता कार्यक्रम शुरू किए - पीएम मोदी के विजन पर आधारित फ्लैगशिप बोइंग सुकन्या कार्यक्रम के तहत लॉन्च किया गया - अमेठी के स्कूलों में लर्निंग लिंक्स फाउंडेशन के साथ 30 बोइंग रूम टू रीड लाइब्रेरी और तीन बोइंग इनोवेशन स्टूडियो का उद्घाटन अमेठी, भारत, 28 फरवरी, 2024 - भारत सरकार की माननीय महिला एवं बाल विकास तथा अल्पसंख्यक कार्य मंत्री, श्रीमती स्मृति जुबिन ईरानी ने आज उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में बोइंग के रूम टू रीड साक्षरता कार्यक्रम के तहत 30 पुस्तकालयों और लर्निंग लिंक्स फाउंडेशन द्वारा 3 बोइंग इनोवेशन स्टूडियो का उद्घाटन किया। मंत्री ईरानी ने अमेठी में महिला साक्षरता को आगे बढ़ाने और बालिकाओं को सशक्त बनाने में मदद करने के लिए जिले में बोइंग साक्षरता कार्यक्रम शुरू किया। भारत के माननीय प्रधान मंत्री, श्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में राष्ट्र को बोइंग सुकन्या कार्यक्रम समर्पित किया था, जिसका उद्देश्य पूरे भारत की लड़कियों और महिलाओं को एसटीईएम (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, गणित) क्षेत्र में महत्वपूर्ण कौशल सीखने और विमानन क्षेत्र में नौकरियों के लिए प्रशिक्षण के अवसर प्रदान करना है। इस मौके पर श्रीमती ईरानी ने कहा “सबसे बड़ी बात ये है कि मैं बोइंग सुकन्या कार्यक्रम के माध्यम से भारत के विमानन क्षेत्र में अपने देश की बेटियों की भागीदारी आगे बढ़ाने में मदद करने के विजन के लिए हमारे प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की आभारी हूँ। मुझे इस बात की भी उतनी ही खुशी है कि इस कार्यक्रम के तहत, हमने अमेठी में 60 बोइंग - रूम टू रीड लाइब्रेरी और बोइंग एसटीईएम लैब स्थापित करके साक्षरता अभियान का विस्तार किया है। आज इनमें से 30 लाइब्रेरी और तीन एसटीईएम लैब अमेठी में बच्चों के लिए पूरी तरह से चालू हो गए हैं। इस तरह के कार्यक्रम न केवल हमारी बालिकाओं और महिलाओं के लिए शिक्षा को सुलभ और रोजगार को समावेशी बनाते हैं बल्कि प्रत्येक महिला को परिवार, समुदाय और देश में निर्णय लेने का केंद्र बनने के लिए सशक्त बनाते हैं - और यही वह दृष्टिकोण है जिसे हम जिले और राष्ट्र के लिए आगे बढ़ा रहे हैं।” आज अमेठी में उद्घाटन समारोह में मंत्री ईरानी के साथ वरिष्ठ सरकारी और जिला अधिकारी, बोइंग इंडिया चीफ ऑफ स्टाफ और बोइंग ग्लोबल एंगेजमेंट लीड, भारत और दक्षिण एशिया, सुश्री प्रवीणा यज्ञभट, लर्निंग लिंक्स फाउंडेशन के सीनियर वाईस प्रेसिडेंट श्री सुदीप दुबे, और इनोवेशन ऐंड डोनर इंगेजमेंट, रूम टू रीड इंडिया के डायरेक्टर श्री ऋषि राजवंशी भी उपस्थित थे। बोइंग इंडिया और दक्षिण एशिया के अध्यक्ष श्री सलिल गुप्ते ने कहा “हमें देश के बढ़ते विमानन क्षेत्र में लड़कियों की अधिक भागीदारी के लिए पीएम मोदी के विजन पर आधारित बुनियादी ढाँचे की स्थापना और शिक्षा को सुलभ बनाने के लिए बोइंग सुकन्या कार्यक्रम के हिस्से के रूप में की व्यक्त की गई प्रतिबद्धता पर गर्व है। हमें खुशी है कि मंत्री ईरानी आज अमेठी जिले में इस अभियान का विस्तार करेंगी'। हम अपने पार्टनर्स रूम टू रीड और लर्निंग लिंक्स फाउंडेशन को भी उनके फोकस और समर्पण के लिए धन्यवाद देते हैं।" वर्ष 2023 में अमेठी जिले में लॉन्च किया गया, बोइंग रूम टू रीड साक्षरता कार्यक्रम स्वतंत्र पाठकों और आजीवन सीखने वालों के पोषण में मदद करने के लिए अगले कुछ वर्षों में अमेठी में 60 प्राथमिक विद्यालयों को शामिल करेगा। ये पुस्तकालय आधुनिक सुविधाओं और संसाधनों से सुसज्जित हैं जिनमें किताबें, पढ़ने की मेज, खुली बुकशेल्फ़, डिसप्ले यूनिट और अन्य शैक्षिक सामग्रियाँ शामिल हैं। इसके अलावा, कार्यक्रम सामुदायिक बैठकों, कार्यक्रमों, ग्रीष्मकालीन शिविरों, पैरेंटल ओरिएंटेशन, स्कूल प्रबंधन समिति प्रशिक्षण और पढ़ने के अभियानों के जरिए परिवार और सामुदायिक जुड़ाव और जागरूकता भी बढ़ाएगा। यह कार्यक्रम शिक्षकों और संकाय के लिए व्यावसायिक विकास प्रशिक्षण भी देगा। यह पहल परिवारों, समुदायों और शिक्षकों के बीच घर और स्कूल में बच्चों की सहायता करने के सही तरीकों के बारे में जागरूकता पैदा करने में मदद करेगा। इस भागीदारी के विषय में रूम टू रीड इंडिया की कंट्री डायरेक्टर, सुश्री पूर्णिमा गर्ग ने कहा, "अमेठी में बोइंग के साथ हमारी साझेदारी 60 स्कूलों के लिए सहायता प्रदान करती है, जो हमारे स्थायी सहयोग को मजबूत करती है। इसने देश भर में 20,000 से ज्यादा छात्रों के जीवन को सकारात्मक रूप से प्रभावित किया है। हमारा दृढ़ विश्वास है कि शिक्षा सभी के लिए एक मौलिक अधिकार है और बोइंग के साथ मिलकर हम उत्तर प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता, विशेष रूप से बच्चों के मूलभूत शिक्षण कौशल में सुधार के लिए राज्य सरकार के मिशन प्रेरणा को आगे बढ़ाने के लिए समर्पित हैं।” इसी तरह एक प्रसिद्ध लाभ-निरपेक्ष संगठन लर्निंग लिंक्स फाउंडेशन (एलएलएफ) के साथ साझेदारी में बोइंग ने तीन इनोवेशन स्टूडियो स्थापित किए हैं जो बच्चों को सहयोगात्मक और व्यावहारिक विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) सीखने में सहायता देंगे। जिले में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 का अनुपालन करने और शिक्षा को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता के साथ निर्मित इन इनोवेशन स्टूडियो को बच्चों के बीच महत्वपूर्ण सोच, रचनात्मकता, सहयोग और समस्या-समाधान जैसे 21 वीं सदी के कौशल को बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इस मौके पर लर्निंग लिंक्स फाउंडेशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष, श्री सुदीप दुबे ने कहा, “एसटीईएम लर्निंग छात्रों को तेजी से प्रौद्योगिकी-संचालित दुनिया में नेविगेट करने के लिए तैयार करने, उन्हें भविष्य के करियर बनाने और राष्ट्र के समग्र विकास में योगदान देने के लिए आवश्यक कौशल से लैस करने के लिए आवश्यक है। लर्निंग लिंक्स फाउंडेशन में हम तेजी से विकसित हो रहे डिजिटल लैडस्केप में सफलता के लिए आवश्यक उपकरणों और ज्ञान के साथ छात्रों को सशक्त बनाने के लिए एसटीईएम पहल को प्राथमिकता देते हैं और एलएलएफ के दृष्टिकोण के अनुरूप आज के लॉन्च हमें प्रसन्नता हो रही है।" एक सामाजिक रूप से जिम्मेदार बिजनेस लीडर के रूप में बोइंग उन समुदायों में जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए प्रतिबद्ध है जिनके बीच वह काम करता है। कौशल, शिक्षा और पोषण, स्वास्थ्य देखभाल और स्वच्छता, वर्क फोर्स डेवलपमेंट और लोगों के कल्याण पर केंद्रित कार्यक्रमों के माध्यम से, बोइंग ने पिछले कुछ वर्षों में भारत में 13 लाख से अधिक लोगों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डाला है।

खण्ड शिक्षा अधिकारी सुमन मिश्रा विद्यालय के पूर्व बच्चों को संस्कारित शिक्षा देने के लिए किया प्रशिक्षित

उत्तरप्रदेश राज्य के जिला अमेठी से एम पी मिश्रा , मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते है कि घरेलू हिंसा समाज केलिए एक कंलक है। कई महिलाएं घरेलु हिंसा का शिकार होती है। वह सामाजिक भेद भाव के कारण वह कानून का सहारा भी नहीं ले पाती है। घरेलु हिंसा को रोकने के लिए हमें शिक्षा पर ध्यान देना चाहिए। दहेज़ के कारण ससुराल में महिलाओं के साथ हिंसा होती है।अगर संतान नहीं हो रही है तो इसके कारण भी महिलाओं को ससुराल में प्रताड़ित किया जाता है। अगर हिंसा से मुक्ति पाना है तो शिक्षा और रोजगार पर ध्यान देना चाहिए। महिलाओं को हिंसा से बचने के लिए कानून का सहारा लेना चाहिए

उत्तरप्रदेश राज्य के अमेठी ज़िला से प्रवीण यादव ,मोबाइल वाणी के माध्यम से अधिवक्ता उषा यादव से बात हो रही है। ये कहती है कि शिक्षा के अभाव के कारण महिला हिंसा की शिकार हो रही है। अगर महिलाएं शिक्षित हो जाएगी तो घरेलु हिंसा से बच जाएगी। साथ ही नशीले पदार्थ में रोक लगानी ज़रूरी है। क्योंकि नशा घर में हिंसा ले कर आता है। नशा मुक्ति होना चाहिए और ज्यादा से ज्यादा शिक्षा का प्रचार हो ,ताकि महिलाएँ घरेलु हिंसा से बच सके। महिलाएं जो भी कोर्ट आती है ,उन्हें मदद मिलती है। महिलाओं के लिए महिला आयोग और कई ऐसे पोर्टल है जो महिलाओं की मदद करते है

जिलाधिकारी ने जिले के माडल स्कूलो का निरीक्षण किया बच्चों से किताब पढ़वाए