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लड़कियों और महिलाओं के ख़िलाफ़ हो रही हिंसा रोकने के लिए शुरू हुए इस प्रोग्राम में आपका स्वागत है। किसी भी तरह की हिंसा रोकने के लिए समाज में रहने वालों के सोच-विचार बदलना बहुत ज़रूरी है।आज इस बारे में हम बात करेंगे पुरुषों के योगदान को लेकर और जानेंगे कि पुरुष किस तरह महिला कल्याण और सशक्तिकरण को बढ़ावा दे सकते है।पुरुषों की भागीदारी से जेंडर के नाम पर होने वाली हिंसा को कैसे ख़त्म किया जा सकता है। अपने विचार ज़रूर रिकॉर्ड करें, फोन में नंबर 3 दबाकर।

दोस्तों, अगर गौर किया जाए तो हमारे आसपास होने वाली छोटी—बड़ी लड़ाईयों, झगड़ों, बहस और नाखुशी के पीछे की वजह अधिकारों का हनन है। महिला है तो उससे आत्मनिर्भर बनने का अधिकार छीन लिया जाता है, बच्चा है तो पढने का, किसी से जाति के नाम पर तो किसी से गरीबी के नाम पर अधिकारों का हनन जारी है और यही है फसाद की वजह। आज जब हम 10 दिसंबर को मानव अधिकार दिवस मना रहे हैं तो फिर एक बार इस विषय पर बात करना जरूरी हो जाता है

गोह प्रखंड मुख्यालय स्थित आजाद जीविका महिला स्वावलंबी सहकारी समिति के द्वारा शनिवार को नई चेतना अभियान पहला बदलाव की ओर लैंगिक समानता एवं लिंग आधारित हिंसा रोकने के मुद्दों को लेकर जागरूकता रैली का आयोजन किया गया। जागरूकता रैली को प्रखंड कार्यालय परिसर में अंचलाधिकारी एवं जीविका बीपीएम ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। सीओं ने जागरूकता अभियान में शामिल महिलाओं को हिंसा के विरुद्ध लागू कानूनों की जानकारी दी। उन्होंने विभिन्न प्रकार के हिंसा जैसे भ्रूण हत्या, शिक्षा से वंचित रखना, बेटा पैदा करने के लिए अनुचित दबाव देना, आर्थिक हिंसा, मनोवैज्ञानिक हिंसा, दहेज प्रथा, आदि विषयों के खिलाफ आवाज उठाने का आह्वान किया।

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