बिहार राज्य के औरंगाबाद जिला से मोबाइल वाणी संवाददाता सलोनी कुमारी जानकारी दे रही हैं कि भूमि स्वामित्व, महिला सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। लेकिन भारत में महिलाओं की भूमि-हीनता उन्हें कई तरह से कमजोर बना रहा है। एक महिला की पहचान उभर कर तब ही आती है, जब वो भूमि पर अपना स्वामित्व रखती है। गांव के लोग उसे हर मामले में शामिल करते हैं। अगर महिला के पास भूमि है, तो वह अपनी मर्जी से उस पर खेती कर या उसका इस्तेमाल कर अपने बच्चे को पढ़ा सकती है। महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो कर आवाज उठानी जरुरी है

बिहार राज्य के औरंगाबाद जिला से मोबाइल वाणी संवाददाता सलोनी कुमारी जानकारी दे रही हैं कि भारत एक पुरुष प्रधान समाज रहा है जिसमें महिलाओं के अधिकारों को हमेशा दबाया गया है, उन्हें केवल घरेलू काम करने के लिए घर की चारदीवारी तक सीमित रखा गया है। महिलाएं आमतौर पर अपने अधिकारों के बारे में नहीं जानती हैं और जब तक उन्हें बताया न जाए, तब तक भूमि के स्वामित्व के बारे में सोचती भी नहीं हैं। हमें महिलाओं को अपने भूमि अधिकारों के लिए लड़ने और उनके अधिकारों को लेने के लिए पर्याप्त जागरूक करना होगा।

बिहार राज्य के औरंगाबाद जिला से सलोनी कुमारी ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिलाओं के जागरूकता का उल्लेख करते हुए एक समाज सेवी ने जानकारी दिया कि कैसे संपत्ति हस्तांतरण की प्रक्रिया में शामिल आधिकारी तबका अपनी पितृसत्तात्मक मानसिकता के कारण महिलाओं की अपीलों को नजरअंदाज करता है। वे आगे जोड़ते हैं कि ‘बेटियों को पैतृक संपत्ति में विरासत का अधिकार हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम, 2005 से ही दिया गया था। इस प्रावधान के लागू होने से पहले, महिलाओं को अक्सर लंबी कानूनी प्रक्रियाओं को अपनाकर, ऐसी भूमि पर अपने अधिकार के लिए लड़ना पड़ता था।’ आज, महिलाओं के भूमि अधिकारों को मुख्यधारा में लाने की मांग करने वाले संगठनों को यह चुनौतीपूर्ण लग सकता है क्योंकि महिलाओं के बीच संपत्ति का स्वामित्व परंपरागत रूप से अस्तित्वहीन या नगण्य रहा है।। आज भी महिलाएं दिन-रात भूमि में काम करती नज़र आती हैं ,फिर भी भूमि के हक़ से वे वंचित हैं। विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।

बिहार राज्य के औरंगाबाद जिला से सलोनी कुमारी ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिलाओं को भूमि अधिकार के लिए लड़ना पड़ेगा, तभी महिलाओं को भूमि अधिकार मिलेगा। महिलाओं के भूमि अधिकारों को मुख्यधारा में लाने के लिए करने वाले संगठनों को यह चुनौतीपूर्ण लग सकता है,क्योंकि महिलाओं का सम्पत्ति का स्वामित्व परम्परागत रूप से अस्तित्वहीन या नगण्य रहा है। इसलिए आगे की योजना बनाना और महिलाओं के जीवन की गरिमा-सम्मान और उनके भूमि अधिकारों के बीच संबंध स्थापित करना सभी के लिए जरूरी है।महिलाओं से यह पूछने पर कि उनके लिए जमीन का क्या मतलब है, उनके बीच की बातचीत इस बिंदु पर पहुंची कि महिलाओं की गरिमा जमीन से कैसे जुड़ी हुई है। यहां तक कि जमीन के मालिक होने का विचार भी महिलाओं को आश्चर्य में डालने वाला और सशक्त बनाने वाला हो सकता है क्योंकि ज़मीन एक बड़ी सम्पत्ति होती है।महिलाओं को न केवल उनके भूमि अधिकारों के बारे में सूचित किया जाना चाहिए बल्कि यह भी बताया जाना चाहिए कि कैसे उनका सम्मान इस अधिकार से जुड़ा हुआ है। इससे वे भूमि को अपने सम्मानजनक जीवन जीने के एक माध्यम के रूप में देख पाएंगी जिसकी उन्हें आकांक्षा भी होती है और जिस तक पहुंचा भी जा सकता है।विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।

बिहार राज्य के औरंगाबाद जिला से कोमल कुमारी ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि भूमि में महिलाओं को बराबरी का हक़ होना चाहिए। ऐसा संविधान में भी कहा गया है। परन्तु समाज में महिलाओं को अभी तक इस अधिकार से वंचित रखा गया है। महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने का साहस रखती हैं , लेकिन उन्हें अपना पूरा हक़ नहीं मिलता है।यदि महिलाओं को भूमि का अधिकार मिलेगा तो वो अपनी सामाजिक और आर्थिक स्थिति को बेहतर बना सकती हैं।विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।

बिहार राज्य के औरंगाबाद जिला से कोमल कुमारी ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि बच्चे खेल और खेल में बहुत कुछ सीखते हैं और उनकी मानसिक स्थिति बहुत अच्छी हो जाती है।हर माता-पिता को अपने बच्चों के साथ थोड़ा समय बिताना चाहिए। उनके साथ खेलें ताकि बच्चे का मानसिक और शारीरिक विकास अच्छी तरह से हो पाए ।विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।

बिहार राज्य के औरंगाबाद जिला से कोमल कुमारी ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिलाओं को भूमि का अधिकार होना बहुत जरुरी है। क्योंकि महिलाओं को पूरी तरह से अपना अधिकार और हक़ अभी तक नही मिला है। इस हक़ से महिलाएं अभी तक वंचित हैं। पुरुषों और महिलाओं के बीच कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। जिससे पुरुषों के समान महिलाओं को भी उनका अधिकार और समानता मिल सके। विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।

बिहार राज्य के औरंगाबाद जिला से सलोनी कुमारी ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि अगर महिलाओं को भूमि अधिकार नही मिलता है तो लोग औरत को घर से भगाने की कोशिश करते हैं और ये भी बोलते हैं कि तुम्हारा यहां बचा क्या है। विधिवा औरतों के ससुराल वाले उनको कुछ नही समझते हैं और उनको जमीन पर अधिकार नही देते हैं। महिला सशक्तिकरण कार्यक्रमों को अपने दायरे में भूमि अधिकारों को शामिल करने के बारे में सोचना चाहिए। क्योंकि भूमि व्यक्ति की पहचान और अस्तित्व से गहरा जुड़ा होता है।व्यक्तिगत और संस्थागत दोनों ही स्तरों पर एक समग्र दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि गरिमा और समानता इस तरह के पाठ्यक्रमों का एक अभिन्न पहलू है। विशेष रूप से जो कार्य योजनाएं लोगों के सबसे कमजोर वर्गों के लिए बनाई गई हैं। भूमि, महिलाओं की पहचान, स्वतंत्रता, अधिकार और आजीविका का मूलभूत आधार है। यदि हम भूमि अधिकारों के बारे में बात नहीं कर रहे हैं तो हम महिलाओं के लिए सम्मान और समानता के जीवन का मार्ग प्रशस्त करने वाले एक महत्वपूर्ण घटक को पीछे छोड़ रहे हैं।विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।

बिहार राज्य के औरंगाबाद जिला से सलोनी कुमारी ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि भूमि अधिकार से जुड़ी कुछ ऐसी समाज में समस्याएं हैं जो बहुत पहले से चलते आ रहे हैं। मगर जब मुझे पता चला भूमि अधिकार जैसे मामलों में काम करने वाले लोगों की जरुरत है तो मैंने मैंने तुरंत इस पद के लिए काम करना शुरू कर दिया। इनके दादाजी के देहांत के बाद दादी को अपनी संपत्ति के कागजात प्राप्त करने में बहुत परेशानी हुई थी,इसलिए इन्होने विधवा महिलाओं की सहायता करने का निर्णय लिया। हमारे समाज में विधवाओं को अक्सर अपनी संपत्ति से वंचित किया जाता है क्योंकि उनके पास अपने अधिकारों को साबित करने के लिए कोई ठोस कागज या सबूत नहीं होता है। संपत्ति में अधिकार मिलने से विधवा महिलाओं को अपने बच्चों के भरण-पोषण और शिक्षा में आसानी हो जाती है तथा उन्हें कई तरह के सरकारी लाभ भी मिलते हैं। सलोनी अधिकांश महिलाओं को भूमि अधिकार दिलाने के लिए काम करना शुरू कर दिया है। हर महिला को भूमि अधिकार मिल जाना चाहिए। विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।

बिहार राज्य के औरंगाबाद जिला से सलोनी कुमारी ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि एक महिला सुबह से लेकर रात तक घर के कामों में लगी रहती है। फिर भी वो अचंभित है कि आखिर उसे भूमि का अधिकार क्यों नहीं मिल रहा है? महिलाओं को अब जागरूक होना होगा और मैके तथा ससुराल दोनों जगह की सम्पत्ति में अपना नाम जुड़वाना होगा। समाज में आय दिन विभिन्न प्रकार के सम्पत्ति विवाद देखने को मिलते रहते हैं। इसलिए महिलाओं को सम्पत्ति से जुड़े सभी कागजातों को देखकर समझ लेना चाहिए। विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।