आईबी अधिकारी बता प्रयागराज में नौकरी दिलाने के नाम पर लिए 15 लख रुपए केस दर्ज
गोलघर मल्टी लेवल पार्किंग संचालन से पहले जमा करने होंगे 33 करोड रुपए जानिए नियम व शर्तें
नगर निगम सदन की बैठक कल पार्षद ने ज्ञापन देकर मेयर के सामने रखें यह महत्वपूर्ण मुद्दे
उत्तर प्रदेश राज्य के गोरखपुर जिला से राज किशोरी सिंह मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रही हैं कि पालन - पोषण के दौरान घर की बात , घर की इच्छा जैसी चीजें दिमाग में इतनी गहरी हो जाती हैं कि सारी कानूनी जानकारी होने के बावजूद अच्छी तरह से शिक्षित महिलाएं भी कभी - कभी हिंसा का दर्द महसूस करती हैं ।उनकी खामोशी तोड़ना बहुत जरूरी है चुप रहने से समय के साथ स्थिति बिगड़ती जाती है । सास - ससुर या मां के पारिवारिक मित्र , चाहे आप कोई भी हों । उसे अपनी समस्याएं बताएं , उस पर भरोसा करें , परिवार के वरिष्ठ सदस्यों से मदद के लिए पूछें , पड़ोसियों को बताएं , पहले संवाद का रास्ता अपनाएं , संबंधित व्यक्ति को समझाने की कोशिश करें । आवाज के लिए एक अस्थायी प्रतिस्थापन खोजने का प्रयास करें , घरेलू हिंसा के समय और तिथि की एक डायरी बनाए रखें , और जब आप शिकायत दर्ज करते हैं तो विवरण को हटा दें ।
उत्तरप्रदेश राज्य के गोरखपुर जिला से राजकिशोरी सिंह मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे हैं कि पेपर लीक की घटनाएँ आने वाली पीढ़ी के भविष्य के लिए खतरनाक हैं । अगर इस तरह की घटनाओं को समय पर नहीं रोका गया तो यह सरकार के लिए एक चुनौती होगी । पेपर लीक की घटनाओं ने देश के हर नागरिक को झकझोर दिया है । इस समस्या से निपटा जा सकता है । परीक्षा में गोपनीयता रखना सर्वोपरि है क्योंकि छात्र का मूल्यांकन प्रश्न पत्र के माध्यम से किया जाता है । आज पेपर सेट करने वाले शिक्षक इसे विशेष रूप से लिखते हैं और फिर इसे एक कर्मचारी द्वारा लिखा जाता है । कंप्यूटर पर प्रश्न पत्र टाइप किया जाता है , बोर्ड में जाने के बाद प्रश्न पत्र लिया जाता है , पैकेज प्रश्न के बाद होता है , ऐसे में एक कमजोर लिंक भी दबाया जाता है ।
Transcript Unavailable.
Transcript Unavailable.
शहरवासियों को फैन सिटी और वाटर पार्क को दावत देने की उम्मीद है
उत्तर प्रदेश राज्य के गोरखपुर जिला से तारकेश्वरी श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रही हैं कि घरेलू हिंसा और घातक मौन घरेलू हिंसा एक ऐसे समाज में एक गंभीर समस्या है जिसमें शारीरिक रूप से जो व्यक्ति मानसिक और आध्यात्मिक रूप से पीड़ित होते हैं , उन्हें अपने अधिकारों के साथ असमान और दमनकारी व्यवहार का सामना करना पड़ता है । इस प्रकार की हिंसा मुख्य रूप से घरेलू वातावरण में होती है और इसमें शामिल हैं पति - पत्नी बच्चे और परिवार के अन्य सदस्यों के बीच कई तरह के झगड़ों में शामिल हो सकते हैं । जो मौन घातक हो जाता है उसे मौन कहा जाता है । यह व्यक्तियों का समर्पण है । यह भय , शर्म या समाजीकरण जैसे विभिन्न कारणों से हो सकता है ।
खजनी गोरखपुर।। खजनी तहसील क्षेत्र में बेलघाट ब्लॉक के जिगिनियां भियांव उर्फ शाहपुर गांव में पूर्व प्रधान और तत्कालीन सचिव की मिलीभगत से अंत्येष्टि स्थल और सामुदायिक शौचालय के निर्माण के लिए आए सरकारी धन का जमकर दुरूपयोग हुआ और बंदरबांट के चक्कर में निमार्ण कार्यों में मानकों की धज्जियां उड़ाते हुए खूब मनमानी की गई। निर्माण कार्य मानक के अनुरूप नहीं किया गया,कार्य भी आधे अधूरे हाल में छोड़ दिए गए। अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए पूर्व प्रधान और तत्कालीन सचिव ने अभिलेखों का ब्यौरा भी खंड विकास कार्यालय में नहीं दिया। वर्तमान प्रधान के द्वारा जब जिलाधिकारी से इसकी शिकायत की गई। और जब जांच हुई तो बड़े पैमाने पर हुए इस भ्रष्टाचार की पोल खुल गई। ग्राम पंचायत में समुदायिक शौचालय के निर्माण के लिए जो रुपया आया उसकी भी निकासी कर ली गई। ग्रामप्रधान की शिकायत पर डीएम ने सीडीओ को पूर्व प्रधान और तत्कालीन सचिव को नोटिस देकर स्पष्टीकरण मांगने और एफआईआर दर्ज कराने का आदेश दिया है। ग्राम पंचायत अधिकारी लोकनाथ को विकास खंड बेलघाट में तैनाती के दौरान ग्राम जिगिनियां भियांव ऊर्फ शाहपुर में अंत्येष्टि स्थल और सामुदायिक शौचालय में पूर्व प्रधान के साथ सरकारी धन के दुरुपयोग की शिकायत मिली। जिसके बाद बीडीओ ने तीन सदस्यों की कमेटी गठित कर जांच कराई। जांच रिपोर्ट के मुताबिक रिकार्ड अपूर्ण होने से जांच पूरी नहीं हो सकी। प्रथम दृष्ट्या कार्यों की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं मिली। 22 मार्च 2023 को बीडीओ ने अभिलेख उपलब्ध कराने को कहा लेकिन उसे नहीं दिया गया। मामले में एडीओ पंचायत द्वारा भी बड़े पैमाने पर धन के दुरुपयोग की शिकायत की गयी थी। लेकिन रिकार्ड न होने से जांच नहीं हो सकी। अपने पूर्व सचिव को चार्ज न देना धन के अपवंचन की श्रेणी में आता है। इसके फलस्वरूप बीडीओ द्वारा भी एडीओ पंचायत को सचिव के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने को लिखा गया है। वहीं डीपीआरओ आशुतोष कुमार ने सचिव को नोटिस जारी कर तीन दिन के अंदर स्पष्टीकरण देने को कहा है कि क्यों न उनके विरुद्ध विभागीय और प्राथमिकी की कार्रवाई शुरू की जाए।
