संतकबीरनगरः एसीएफ के बाद निजी चिकित्सालयों में टीबी का इलाज करा रहे मरीजों को अभियान चला कर खोजा गया। सीएमओ कार्यालय में रजिस्टर्ड 128 चिकित्सालयों में मरीजों का डाटा कलेक्ट किया गया। अब इन मरीजों को भी पौष्टिक भोजन करने के लिए पांच सौ रुपया प्रति माह पोषण भत्ता दिया जाएगा और चिकित्सक को एक हजार रुपए की धनराशि दी जाएगी। महज एक साल बाद जिले को क्षय रोग मुक्त घोषित करने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग अभियान संचालित कर रहा है। इसके लिए हर स्तर पर मरीजों का विवरण संकलित किया जा रहा है। मरीजों की दवाएं न छूटनी पाए इसके लिए स्वास्थ्य विभाग से नियमित रूप से मानीटरिंग की जा रही है। मरीजों की दवाएं चल रही हैं साथ में वह मरीज किसके कांट्रैक्ट में हैं उसकी भी जांच कराई जा रही है और मरीज के संपर्क में रहने वाले परिजनों को भी एम्युनिटी बढ़ाने के लिए दवाएं दी जा रही हैं। निजी क्लीनिक पर मरीजों को खोजने की जिम्मेदारी पीपीएम कविता पाठक को सौंपी गई है। सीएमओ कार्यालय में रजिस्टर्ड 128 निजी चिकित्सालयों 48 टीबी के मरीज चिन्हित हुए हैं। निजी क्षेत्र के चिकित्सकों को मरीज की दवा शुरू करने और जिला क्षय रोग अधिकारी कार्यालय में रजिस्ट्रेशन कराने पर पांच सौ रुपए की धनराशि दी जाएगी। मरीज को कोर्स भर दवा कराने के बाद चिकित्सक को पांच सौ रुपए और भी दिए जाएंगे। दूसरी ओर निजी चिकित्सालय में इलाज करा रहे मरीजों को भी पांच सौ रुपए प्रतिमाह पोषण भक्ता के लिए रूप में दिया जाएगा। ताकि मरीज पौष्टिक भोजन ग्रहण कर सके और बीमारी सेजल्द से जलद निजात पा सके। निजी चिकित्सालयों में टीबी के 48 मरीज चिन्हित इस अभियान से अब तक जिले में कितने मरीज हैं इसका वास्तवित डाटा संकलित हो गया है। निजी क्षेत्र में जो मरीज इलाज करा रहे हैं उनकी कांट्रैक्ट हिस्ट्री भी खोजी जाएगी और संपर्क में रहने वालों की भी जांच होगी। ताकि एक भी क्षय रोगी छूटने न पाए।- ़डा. एसडी ओझा जिला क्षयरोग अधिकारी
