हमारे पुरुष प्रधान समाज में बच्चे और महिलाएं हिंसा का आसानी से शिकार हो जाते है। ऐसा ही हाल ट्रांसजेंडर यानी तीसरे जेंडर का भी है। ये वो लोग है जो खुद को ना पुरुष और ना ही महिला मानते हैं। इनके हक़ के लिए संघर्षरत है पिया कपूर, जो खुद भी एक किन्नर है। पिया का कहना है कि लोग उन्हें भी इंसान समझे। इसके लिए समाज की सोच और कानून में बदलाव बहुत ज़रूरी है।तीसरे जेंडर के लिए लोगों की सोच और भावनाएं कैसे सुधारी जा सकती है? क्या स्कूली शिक्षा के माध्यम से इस समुदाय के लोगों का जीवन बेहतर हो सकता है? अपने विचार और अनुभव हमें बताने के लिए फोन में अभी दबाएं नम्बर 3
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गिद्धौर प्रखंड के बारिआतु पंचायत में सरकार आपके द्वार कार्यक्रम आयोजित हुआ।जहां प्रखंड प्रमुख अनीता यादव जिला परिषद सदस्य अनीता देवी उप प्रमुख प्रीतम यादव मुखिया डेगन गंझु प्रखंड विकास पदाधिकारी हरिनाथ महतो के साथ अन्य सभी जनप्रतिनिधि व अधिकारीओं ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरूआत किया। इसके तहत अनेकों विभाग ने स्टॉल लगाए। जहां अबुआ आवास को लेकर ग्रामीणों में उत्साह देखा गया।
प्रतापपुर प्रखंड अन्तर्गत प्रतापपुर पंचायत में सरकार आपके द्वार कार्यक्रम का आयोजन किया गया।कार्यक्रम का उद्घाटन अंचलाधिकारी नित्यानन्द कुमार दास, बीडीओ अजय कुमार दास, प्रमुख प्रतिनिधि कपिल पासवान,उप प्रमुख कविता देवी व पंचायत की मुखिया बसंती देवी ने फीता काटकर एवं दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
प्रतापपुर प्रखंड के हुमाजांग पंचायत एवं घोरीघाट पंचायत में गुरुवार को ग्राम पंचायत कमिटी का गठन किया गया। कमिटी गठन के मौके पर मुख्य अतिथि बतौर आजसू पार्टी के केन्द्रीय सचिव एवं चतरा विधान सभा प्रभारी अशोक गहलोत उपस्थित थे। सबसे पहले घोरीघाट पंचायत के हेठदोहर में बैठक कर ग्राम पंचायत कमिटी का गठन किया गया।
समाहरणालय स्थित सभा कक्ष में उपायुक्त अबु इमरान के निर्देशानुसार उप विकास आयुक्त उत्कर्ष गुप्ता की अध्यक्षता में जिला स्वास्थ्य समिति तथा अस्पताल प्रबंधन समिति एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा क्रियान्वित सभी कल्याणकारी योजनाओं की समीक्षात्मक बैठक की गई।
चतरा विधायक सह राज्य के श्रम कौशल विकास मंत्री सत्यानन्द भोगता ने चतरा नगरपरिषद क्षेत्र के केशरी चौक निवासी सह बंगाली होटल के संचालक रंजीत नन्दी के असमय निधन की सूचना पर गहरा शोक व्यक्त किया।
बीते दिनों महिला आरक्षण का बहुत शोर था, इस शोर के बीच यह भी ध्यान रखा जाना चाहिए की अपने को देश की सबसे बड़ी पार्टी कहने वाले दल के आधे से ज्यादा भू-भाग पर शासन होने के बाद भी एक महिला मुख्यमंत्री नहीं है। इन सभी नामों के बीच ममता बनर्जी इकलौती महिला हैं जो अभी तक राजनीति में जुटी हुई हैं। वसुंधरा के अवसान के साथ ही महिला नेताओं की उस पीढ़ी का भी अवसान हो गया जिसने पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय तक महिलाओं के हक हुकूक की बात को आगे बढ़ाया। यह सब ऐसे समय में हो रहा है जबकि देश में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिये जाने की बात की जा रही है। एक तरफ महिला नेताओं को ठिकाने लगाया जा रहा है, दूसरी तरफ नया नेतृत्व भी पैदा नहीं किया जा रहा है।
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