उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से दीपा मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि हिंदू कानून के अनुसार बेटियों को अपने पिता की संपत्ति में बेटो के समान ही अधिकार है। बेटियों को पिता की संपत्ति में हिस्सा मिलता है
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से दीपा मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि धारा 361 अनुसार यदि किसी महिला की आयु 18 वर्ष के कम है और कोई व्यक्ति उनकी अनुमति बिना उससे संपत्ति हासिल करना चाहे तो उसके लिए कानून महत्वपुर्ण होता है
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उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से संस्कृति श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि महिलाओं का अधिकार भविष्य के लिए भी ज़रूरी है। लड़की जब अपने अधिकार जानती है तो वो अपनी बेटी ,बहन और पूरे समाज के लिए रास्ता बनाती है। सोचिये एक ऐसा देश जहाँ महिला बिना डर के जीती हो ,बराबरी का मौका और सम्मान मिले वही देश आगे बढ़ता है। जब कोई व्यक्ति अपने घर से शुरुआत कर महिला को अधिकार देता है तो इस छोटे कदम से पूरा देश बदलता है। देश प्रगति की ओर आगे बढ़ता है। जब देश में काम करने वाले और मज़बूत ज़्यादा होंगे तब ही देश आगे बढ़ पाएगा। महिलाओं को लोग पीछे कर के देश की आधी आबादी को काम करने से बिलकुल वंचित कर देते है जो कि बहुत गलत है। अगर समाज और देश का उद्धार करना है तो सब को मज़बूत बनाना पड़ेगा और सब को काम करना होगा
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उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से संस्कृति श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि अगर महिला आत्मनिर्भर रहती है ,महिला खुद कमा रही होती है। उनका खुद का बैंक अकाउंट ,प्रॉपर्टी हो तो वो सिर्फ घर चलाने वाली नहीं बल्कि निर्णय लेने वाली बन जाती है। महिला आर्थिक रूप से मज़बूत रहती है तो वो गलत चीज़ पर हाँ कहने पर मज़बूर नहीं होती ,मर्ज़ी से शिक्षा प्राप्त कर सकती है,काम कर सकती है और गलत रिश्ते से बाहर निकल सकती है। उन्हें सहारे की ज़रुरत नहीं होती ,वो खुद सक्षम होती है। महिलाओं के अधिकार का मतलब सिर्फ सम्मान नहीं बल्कि स्वतंत्रता भी है। जब महिला स्वतंत्र होती है तो वो दूसरों की ज़िन्दगी भी बदल सकती है
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से संस्कृति श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि महिलाओं के अधिकार की बात अक्सर हम सोशल मीडिया ,टीवी आदि पर करते है पर वास्तव में यह घर से शुरू होता है। जब घर में लड़की और लड़के को अलग नियम सिखाए जाते है ,लड़की चुप रहे और लड़के फैसले करे यही अधिकार का संतुलन बिगड़ने लग जाता है। यहीं से महिला को महसूस होने लगता है कि इनका किसी भी फैसले में शामिल नहीं होना है केवल घर संभालना है। महिला को बात रखने का हक़ हो ,गलती करने का हक़ हो ,सपने देखने का हक़ हो सबसे महत्वपुर्ण महिला को अच्छी बेटी और अच्छी बहु बनने के दबाव से बाहर निकलने का हक़ हो। अगर लोग चाहते है महिला अपने अधिकार जाने तो पहले घर में बराबरी को लागू करना होगा। बदलाव बाहर से नहीं आता ,बदलाव लोगों से ही आता है।
