भारत में खेती से जुड़ें कामों में महिलाओं की भागीदारी 70% के लगभग है जबकि वास्तिविकता में यह 15 प्रतिशत के करीब आती है सरकारी आंकड़ों के अनुसार लगभग 30% महिलाओं को ही “किसान” के तौर पर जाना जाता है. यह भारत में कामकाजी महिलाओं का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा खेती और उससे जुड़े कार्यों में लगा हुआ है.
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अधिकांश व्यक्तिगत पट्टे पुरुषों के नाम पर होते हैं. सामुदायिक अधिकारों में भी महिलाओं को भी कम प्रतिनिधित्व दिया जाता है. इसके चलते महिलाएं केवल खेत मजदूर बनकर रह जाती हैं. महिलाओं को इसका नुकसान यह होता है कि बैंक, बीमा तथा दूसरी सरकारी सहायता का लाभ नहीं उठा पाती है, जो उनके लिए चलाई जा रही हैं.
उत्तरप्रदेश राज्य के जिला बहराइच के विशेश्वरगंज से प्रेमा देवी मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती है कि मजदूर को पैसा नहीं मिल रहा है। सरकार के तरफ से पैसा नहीं मिल रहा है
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नाम -मुहर्रम अली ,पिन कोड - 271871,उम्र -52
नाम -मुहर्रम अली ,पिन कोड - 271871,उम्र -52
नाम मिथिलेश पांडेय। उम्र 50 साल।पिन कोड - 271801
राजेश्वर सिंह, पिन कोड 271821, उम्र 48 वर्ष
