उत्तरप्रदेश राज्य के बहराइच जिला से शालिनी पांडेय मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रही हैं कि हम सभी जानते हैं कि जल ही जीवन है।इसलिए अगर हमें कल के लिए पानी की आवश्यकता है, तो इसे बचाएं। जल हमारे जीवन की मूलभूत आवश्यकता है।पानी के बिना हमारा जीवन असंभव है। पानी बचाने के लिए हमें थोड़ी जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है। पानी का उपयोग उतना ही करना चाहिए जितना पानी की आवश्यकता हो।
उत्तरप्रदेश राज्य के बहराइच जिला से शालिनी पांडेय मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रही हैं कि अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों में, वे केवल घरेलू काम करना अपनी प्राथमिकता मानते हैं, लेकिन आज के समय में महिलाओं की स्थिति में काफी बदलाव आया है। समस्याओं के बाद भी अब महिलाएं घर पर नहीं रहती हैं, वे चारदीवारी तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि वे हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलती हैं। अब महिलाएं आगे बढ़ रही हैं
उत्तरप्रदेश राज्य के बहराइच जिला से शालिनी पांडेय मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रही हैं कि महिलाओं के लिए शिक्षा बहुत महत्वपूर्ण है।उन्हें यह समझना चाहिए कि शिक्षा महिलाओं को सशक्त बनाती है और उन्हें अपने और अपने परिवार के लिए बेहतर भविष्य बनाने में मदद करती है। शिक्षित लड़कियों की कम उम्र में शादी करने की संभावना कम होती है। यदि महिला शिक्षित नहीं है, तो वह एक सफल गृहिणी या एक कुशल माँ नहीं बन पाएगी।
उत्तरप्रदेश राज्य के बहराइच जिला से शालिनी पांडेय मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रही हैं कि महिलाएँ परिवार की आधारशिला होती हैं और सामाजिक विकास केवल उस समाज के प्रयासों से ही संभव है जिसकी महिलाएं उपेक्षा और तिरस्कार का शिकार नहीं होती हैं।
उत्तरप्रदेश राज्य के बहराइच जिला से मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे हैं कि पानी टंकी का पानी सप्लाई न होने के कारण जनता परेशान हैं
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उत्तर प्रदेश राज्य के बहराइच जिला से साक्षी कुमारी मोबले वाणी के माध्यम से बता रही है की हर किसी की पहचान उनके नाम से की जाती है, चाहे वे पुरुष हों या महिलाएँ, गाँव की अधिकांश महिलाओं की पहचान उनके नाम से नहीं बल्कि उनके परिवार के सदस्यों के नाम से की जाती है।ससुराल में महिलाओं को उनके ससुरालवालो के नामों और उनके पतियों और बच्चों के नामों से जाना जाता है।
उत्तरप्रदेश राज्य के बहराइच जिला से शालिनी पांडेय मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रही हैं कि हम किस तरह पिछड़ी हुई असमानता को समाप्त कर सकते हैं। या असमानताएँ बनी रहती हैं, लेकिन वास्तविक परिवर्तन तभी संभव है जब पुरुषों की सोच बदल जाए। इसे अधीनता के रूप में सोचना शुरू न करें या यह भी कि न केवल पुरुषों बल्कि महिलाओं को भी आज की संस्कृति के अनुसार अपनी पुरानी रूढ़ियों को बदलना होगा।
उत्तरप्रदेश राज्य के बहराइच जिला से शालिनी पांडेय मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रही हैं कि भारतीय समाज में महिलाओं को अक्सर घरेलू काम के लिए अधिक उपयुक्त माना जाता है। घर में महिलाओं का मुख्य काम भोजन की व्यवस्था करना और बच्चों की परवरिश करना है। यह अक्सर देखा गया है कि घर में जो निर्णय लिए जाते हैं उनमें महिलाओं की कोई भूमिका नहीं होती है। महिलाओं के मुद्दों से संबंधित विभिन्न सामाजिक संगठनों से भी महिलाओं की न्यूनतम संख्या लैंगिक असमानता की हानिकारक प्रकृति को व्यक्त करती है। आर्थिक क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं और पुरुषों की श्रम शक्ति में अंतर है। औद्योगिक क्षेत्रों में महिलाओं को अक्सर पुरुषों की तुलना में कम वेतन दिया जाता है।
