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हंसने-हंसाने से इंसान खुश रहता है, जिससे मानसिक तनाव, चिंता और डिप्रेशन कम होता है। दोस्तों, उत्तम स्वास्थ्य के लिए हंसी-मज़ाक बहुत ज़रूरी है। इसीलिए मोबाइल वाणी आपके लिए लेकर आया है कुछ मजेदार चुटकुले, जिन्हें सुनकर आप अपनी हंसी रोक नहीं पाएंगे। हो जाइए तैयार, हंसने-हंसाने के लिए...
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नर्मदा क्षेत्र बरमान में रविवार को सूरजकुंड स्नान करने जाने वालों की भीड़ जिले से ही नहीं बरन पूरे प्रदेश से पहुंचती है कई वर्षों से नर्मदा क्षेत्र बरमान के सूरजकुंड में रविवार के दिन स्नान करने वालों की भारी भीड़ पहुंचती है ऐसी किवदंती है कि महाभारत काल मे कुंती ने यहां पर सूर्य की आराधना कर संतान के रूप में कर्ण को पाया था इसलिए इस कुंड को सूरजकुंड कहा जाता है इस सूरजकुंड का नर्मदा जल कड़ाके की ठंड में भी गुनगुना बना रहता है हिंदू परंपरा अनुसार सूर्य की रविवार को पूजा की जाती है इसलिए इस सूरजकुंड में लोग रविवार को स्नान कर सूर्य की पूजा करते हैं लोगों का ऐसा मानना है की पांच रविवार सूरजकुंड में जो स्नान करता है सारे चर्म रोग एवं अन्य रोग दूर हो जाते हैं इसलिए रविवार को सूरजकुंड में आस्था का सैलाब उमड़ता है
आज अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के उपलक्ष में आमगांव बड़ा में 351 कलश के साथ निकली प्रभु श्रीराम की शोभायात्रा आमगांव बड़ा अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के उपलक्ष में खेरापति मंदिर से 351 कलश की शोभायात्रा महिलाओं द्वारा निकाली गई इस शोभायात्रा में जहां भगवान श्री राम की झांकी एवं 12 फीट की भगवान श्री राम की प्रतिमा शोभायमान थी वही.शोभायात्रा में राधा कृष्ण का नृत्य आकर्षण का केंद्र था इस दौरान ग्राम के सभी मंदिर विशेष सजा और रंगोली से सजाए गए थे अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के 15 दिन पूर्व से ही ग्राम राममय हो गया है शोभायात्रा में जहां श्री राम के जयकारों की गूंज रही वहीं भगवान श्री राम के भजनों से ग्रामीण झूमते गाते नजर आए राम आएंगे तो अंगना सजाएंगे गीत को ग्रामीणों ने सच कर दिखाया शोभायात्रा के स्वागत के लिए ग्राम के घर-घर में रंगोली सजाकर दीप जलाए लोगों ने घरों से निकलकर भगवान श्री राम की पूजन अर्चन की शोभायात्रा ग्राम के विभिन्न मोहल्ले में पहुंची शोभा यात्रा का समापन मुख्य बाजार में श्री राम जानकी मंदिर और हनुमान मंदिर में हुआ
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सोमवार को शीतलहर का असर बरकरार रहेगा । हवाएं उत्तरी रहने से ठिठुरन कायम रहेगी । हल्का मध्यम कोहरा छाया रहेगा । मध्यप्रदेश में सबसे कम तापक्रम रविवार को दतिया का 3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया ।
हमारा जन्म मां के गर्भ में होता है, गर्भ में संपूर्ण शारीरिक विकास की प्रक्रियां में हम गर्भ की नाल से जुड़े होते है, यह हमें सुरक्षित रखता है। क्यों कि तब हम पूर्णतः स्वतंत्र होते है, किसी वस्तू की जिज्ञासा नहीं होती है, न भविष्य की कल्पना, न अतित की चिंता होती है। लेकिन जैसे ही मां की गर्भ से बहार आते तब हमारी नाल काटी जाती है तब हमारा संबंध में मा के गर्भ की बहार की दुनिया से जुड़ता है। जहा जिज्ञासा, भविष्य की कल्पना, अतित की चिंता से लेकर अस्तित्व का विषय जुड़ जाते है। गर्भ में हम सुरक्षित महसूस करते थे, लेकिन जैसी ही गर्भ के बहार नई दुनिया में प्रवेश करते तब स्वंय को असुरक्षित महसूस करते है। मां के गर्भ से निकला शिशु प्रारंभिक अवस्था में सामन्य आवाज में भी भयभीत होता है, आवाज की ध्वनी अधिक हो तो वह रोने लगता है। मां के गर्भ से बहार निकलने के बाद शिशु का ब्रेन सामन्यतः पूर्ण खाली होता है, असुरक्षा की भवाना उसके ब्रेन के अर्धचेतन अवस्था में रिकार्ड होने लगती है। इसी असुरक्षा की भावना से भय की शुरूआत यही से होती है।
