बिहार राज्य के जिला नवादा के नारदीगंज प्रखंड से तारा कुमारी की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से सोभा कुमारी से हुई। सोभा कुमारी यह बताना चाहती है कि उनको जमीन में अधिकार दिया गया है। उनका नाम से जमीन होने में रुकावट आ रही थी। लेकिन अब उनको जमीन पर अधिकार मिल गया है। वह जमीन में पोषण वाटिका लगाई है।
सुनिए डॉक्टर स्नेहा माथुर की संघर्षमय लेकिन प्रेरक कहानी और जानिए कैसे उन्होंने भारतीय समाज और परिवारों में फैली बुराइयों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई! सुनिए उनका संघर्ष और जीत, धारावाहिक 'मैं कुछ भी कर सकती हूं' में...
बिहार राज्य के जिला नवादा के नारदीगंज प्रखंड से तारा कुमारी की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से आकाशी कुमारी से हुई। आकाशी कुमारी यह बताना चाहती है कि महिलाओं को मायके और ससुराल में जमीन पर अधिकार नहीं दिया जाता है। अधिकार नहीं मिलने पर महिला कोई भी काम नहीं कर पाती है। इसीलिए उनको अधिकार दिया जाना चाहिए।
उत्तरप्रदेश राज्य के नवादा ज़िला के नारदीगंज प्रखंड से बिंदु देवी की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से सुनीता देवी से हुई। सुनीता देवी कहती है कि पिता की संपत्ति में बेटी का अधिकार होना चाहिए। कानून के अनुसार पिता की संपत्ति में बेटा और बेटी का बराबर का अधिकार है
उत्तरप्रदेश राज्य के नवादा ज़िला के नारदीगंज प्रखंड से बिंदु देवी की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से फूल देवी से हुई। फूल देवी कहती है कि पिता की संपत्ति में उतना अधिकार है जितना बेटा का होता है
बिहार राज्य के नवादा जिला से बिंदु देवी ने मोबाइल वाणी के माध्यम से फूल कुमारी से बातचीत किया। बातचीत के दौरान फूल ने बताया कि पैतृक संपत्ति में महिलाओं का भी अधिकार है। महिलाओं को पिता की संपत्ति में अधिकार मिलेगा तो परिवार और समाज में महिलाओं का सामान बढ़ेगा।
बिहार राज्य के नवादा जिला से बिंदु देवी ने मोबाइल वाणी के माध्यम से रानी देवी से बातचीत किया। बातचीत के दौरान रानी ने बताया कि महिलाओं को शिक्षित होना बहुत जरूरी है। महिलाएं शिक्षित होंगी तो वे अपने बच्चों को भी शिक्षित कर पाएंगी। महिलाएं शिक्षित हो कर खुद का रोजगार भी कर सकती है
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साथियों, मनुष्य एवं समस्त प्राणी जगत को जीवित रहने के लिए भोजन एक प्रमुख संघटक होता है। और भोजन पाना हर व्यक्ति का अधिकार होता है लेकिन दुर्भाग्य से दुनिया में हर किसी के पास खाने के लिए पर्याप्त भोजन नहीं है कई लोग ऐसे हैं, जो हर दिन भूखे पेट सोने को बेबस हैं । लेकिन दूसरी ओर यह भी देखने को मिलता है की लोग भोजन की बर्बादी भी करते हैं। लोगों में भोजन के महत्व को समझाने और जरूरतमंद लोगों को दो वक्त के भोजन मिल पाए इस उद्देश्य से हर वर्ष 16 अक्टूबर को विश्व खाद दिवस मनाया जाता है।
सुनिए डॉक्टर स्नेहा माथुर की संघर्षमय लेकिन प्रेरक कहानी और जानिए कैसे उन्होंने भारतीय समाज और परिवारों में फैली बुराइयों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई! सुनिए उनका संघर्ष और जीत, धारावाहिक 'मैं कुछ भी कर सकती हूं' में...