जहां एक ओर बे मौसम बरसात होने से आम आदमी के जीवन पर ठंड का प्रभाव पड़ रहा है वही इससे पशु पक्षी भी परेशान हैं इसके साथ ही हल्की बारिश होने के कारण फसलों को लाभ भी हो रहा है इसलिए जहां जनता को शारीरिक कष्ट हो रहा है वहीं खेती किसानी में इसका अच्छा प्रभाव भी पड़ रहा है।
राजधानी के विकासखंड माल में दर्जन घर से अधिक शौचालय बनाए गए हैं ,जिनमें एक हाईटेक शौचालय भी है। इन सभी शौचायलयों में गंदगी होने की साथ-साथ हमेशा ताला लटकता रहता है, जिससे विकासखंड कार्यालय और बाजार में चौराहे पर आने वाले नागरिक अगर पेशाब करने या सौच करने के लिए शौचालय ढूंढते ढूंढते अंदर आ जाते हैं तो ताला बंद देखकर वह इधर-उधर गंदगी फ्लेट हैं और पेशाब करते देखे जा सकते हैं इसके अलावा लोग गेट के अगल-बगल भी पेशाब करके गंदगी फैलाते हैं फिर भी यहां के अधिकारियों पर कोई असर नहीं हो रहा है।
प्रदेश सरकार अधिकारियों को मुख्यालय पर निवास करने के कितने भी कड़े निर्देश दे परंतु अधिकारी कर्मचारी अपनी आदतों से बाज नहीं आने वाले हैं इसी का नतीजा है कि किसी भी कार्यालय में अधिकारी समय से नहीं पहुंचते हैं इसका उदाहरण विकासखंड माल का कार्यालय है जहां कभी भी अधिकारी कर्मचारी समय से कार्यालय नहीं पहुंचते हैं जिससे कई बार जनता या पीड़ित व्यक्ति इधर-उधर भटकते देखे जाते हैं परंतु इससे अधिकारियों पर कोई फर्क नहीं पड़ता।
राजधानी के विकासखंड माल की ग्राम पंचायत रामनगर के किसानों ने आवारा पशुओं से परेशान होकर आज सुबह 9:00 बजे करीब दो दर्जन आवारा पशुओं को परिसर में बंद कर दिया जिसकी सूचना उच्च अधिकारियों को पहुंचने के बाद अधिकारी हरकत में आए और उन्होंने ग्राम पंचायत रामनगर के प्रधान के माध्यम से डाले में भरकर पशुओं को चंदवारा की गौशाला में भिजवा दिया जिससे किसानों को काफी राहत मिलेगी।
लड़कियों के सपने सच में पुरे हो , इसके लिए हमें बहुत सारे समाजिक बदलाव करने की ज़रूरत है। और सबसे ज्यादा जो बदलाव की ज़रूरत है, वो है खुद की सोच को बदलने की। शिक्षा महिलाओं की स्थिति में बड़ा परिवर्तन ला सकती है लेकिन शिक्षा को लैंगिक रूप से संवेदनशील होने की जरूरत है। गरीब और वंचित समूह के बच्चों को जीवन में शिक्षा में पहले ही सीमित अवसर मिलते हैं उनमें से लड़कियों के लिए और भी कम अवसर मिलते हैं, समान अवसर तो दूर की बात है। सरकारी स्तर पर जितने ही प्रयास किये जा रहे हों, यदि हम समाज के लोग इसके लिए मुखर नहीं होंगे , तब तक ऐसी भयावह रिपोर्टों के आने का सिलसिला जारी रहेगा और सही शौचालय न होने के कारण छात्राओं को मजबूरी में स्कूल छोड़ने का दर्द सताता रहेगा। तब तक आप हमें बताएं कि *----- आपके गांव में सरकारी स्कूल में शौचालय है, और क्या उसकी स्थिति कैसी है? *----- क्या आपको भी लगता है कि सरकारी स्कूल में शौचालय नहीं होने से लड़कियों की शिक्षा से बाहर होने का बड़ा कारण है *----- शौचालय होने और ना होने से लड़कियों की शिक्षा किस प्रकार प्रभावित हो सकती है?
हंसने-हंसाने से इंसान खुश रहता है, जिससे मानसिक तनाव, चिंता और डिप्रेशन कम होता है। दोस्तों, उत्तम स्वास्थ्य के लिए हंसी-मज़ाक बहुत ज़रूरी है। इसीलिए मोबाइल वाणी आपके लिए लेकर आया है कुछ मजेदार चुटकुले, जिन्हें सुनकर आप अपनी हंसी रोक नहीं पाएंगे। हो जाइए तैयार, हंसने-हंसाने के लिए सुनिए हंसी-मज़ाक में डूबे हंसगुल्ले और रिकॉर्ड कीजिए अपने चुटकुले, मोबाइल वाणी पर, फोन में नंबर 3 का बटन दबाकर।
जन्म से आठ साल की उम्र तक का समय बच्चों के विकास के लिए बहुत खास है। माता-पिता के रूप में जहाँ हम परवरिश की खूबियाँ सीखते हैं, वहीँ इन खूबियों का इस्तेमाल करके हम अपने बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को बढ़ावा दे सकते है। इस बारे में श्रोताओं की क्या राय है, चलिए सुनते हैं. इस बारे में बचपन मनाओ... सुन रहे दूसरे साथियों को भी जानकारी दें। अपनी बात रिकॉर्ड करने के लिए दबाएं नंबर 3.
सुनते है बच्चों के लिए बना ये प्यारा सा गाना, जिसमें बात हो रही है सेहतमंद खाने और साबुन से हाथ धोने की। ये गाना आपके बच्चों को कैसा लगा? आप अपने बच्चों को किस तरह का पौष्टिक खाना देते है? क्या आप उन्हें खाने से पहले साबुन से हाथ धोने के लिए कहते है? हमें बताएं फोन में नंबर 3 दबाकर।
एक सामान्य समझ है कि कानून और व्यवस्था जनता की भलाई के लिए बनाई जाती है और उम्मीद की जाती है कि जनता उनका पालन करेगी, और इनको तोड़ने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इसके उलट भारतीय न्याय संहिता में किये गये हालिया बदलाव जनता के विरोध में राज्य और पुलिस को ज्यादा अधिकार देते हैं, जिससे आभाष होता है कि सरकार की नजर में हर मसले पर दोषी और पुलिस और कानून पूरी तरह से सही हैं।
