उत्तरप्रदेश राज्य के लखनऊ ज़िला से नवनीत ,लखनऊ मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते है कि मोहनलालगंज प्रखंड के भजनमउ ग्राम के खेतों में हाईटेंशन तार नीचे लटक रहा था। इस कारण किसानों को अपने खेतों में जा कर काम करने में भय सताता था। इस समस्या को देखते हुए दिनांक 7 दिसम्बर 2023 को लखनऊ मोबाइल वाणी में ख़बर को प्रसारित किया गया और मोबाइल वाणी की टीम द्वारा इस ख़बर को विद्युत विभाग के अधिशासी अभियंता घनश्याम त्रिपाठी के साथ साझा किया गया। जिसका त्वरित असर यह देखने को मिला कि अधिशासी अभियंता के आदेश पर विद्युत विभाग के अधिकारियों की टीम मौके पर पहुँची और क्षेत्र का दौरा किया। जिसके बाद खेत में पोल लगा कर लटक रहे हाईटेंशन के तार को ऊँचा कर के लाइन दुरुस्त करने का कार्य शुरू कर दिया गया है।
राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत पल्स पोलियो अभियान 10 दिसंबर से 15 दिसंबर तक चलाया जा रहा है जिसमें जनता की भागीदारी जरूरी है तभी अभियान को सफल बनाया जा सकता है।
लड़कियों और महिलाओं के ख़िलाफ़ हो रही हिंसा रोकने के लिए शुरू हुए इस प्रोग्राम में आपका स्वागत है। किसी भी तरह की हिंसा रोकने के लिए समाज में रहने वालों के सोच-विचार बदलना बहुत ज़रूरी है।आज इस बारे में हम बात करेंगे पुरुषों के योगदान को लेकर और जानेंगे कि पुरुष किस तरह महिला कल्याण और सशक्तिकरण को बढ़ावा दे सकते है।पुरुषों की भागीदारी से जेंडर के नाम पर होने वाली हिंसा को कैसे ख़त्म किया जा सकता है। अपने विचार ज़रूर रिकॉर्ड करें, फोन में नंबर 3 दबाकर।
दोस्तों, अगर गौर किया जाए तो हमारे आसपास होने वाली छोटी—बड़ी लड़ाईयों, झगड़ों, बहस और नाखुशी के पीछे की वजह अधिकारों का हनन है। महिला है तो उससे आत्मनिर्भर बनने का अधिकार छीन लिया जाता है, बच्चा है तो पढने का, किसी से जाति के नाम पर तो किसी से गरीबी के नाम पर अधिकारों का हनन जारी है और यही है फसाद की वजह। आज जब हम 10 दिसंबर को मानव अधिकार दिवस मना रहे हैं तो फिर एक बार इस विषय पर बात करना जरूरी हो जाता है
"गांव आजीविका और हम" कार्यक्रम के तहत हमारे कृषि विशेषज्ञ कपिल देव शर्मा पूसा डिकंपोजर क्या है और खेत में इसके क्या लाभ है इसके बारे में जानकारी दे रहे है। अधिक जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें
जेंडर हिंसा के खिलाफ चलने वाले इस कार्यक्रम, 'बदलाव का आगाज़', में आज सुनिए प्रियंका जी को, जिनका कहना है कि जब तक एक ट्रांसजेंडर या कहें ख़ुद को महिला और पुरुष के दायरे में ना रखने वाले हर इंसान को इंसान नहीं समझा जाएगा, उनके ख़िलाफ़ समाज में फैली हिंसा और नफ़रत कम नहीं होगी
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