वर्ष 2024 की होली के मौके पर कई विभागों द्वारा सरकारी नौकरियों (Top Government Jobs 2024) के लिए विज्ञापन जारी किए गए हैं। इनमें से कई के लिए तो आवेदन प्रक्रिया शुरू भी हो चुकी है। आइए इन्हीं में से हम आपको कुछ प्रमुख सरकारी नौकरियों के बारे में बताते हैं जिनके लिए आवेदन इस रंगो के त्यौहार के अवसर पर कर सकते हैं।

"गांव आजीविका और हम" कार्यक्रम के तहत हमारे कृषि विशेषज्ञ कपिलदेव शर्मा मछली पालन से जुड़ी जानकारियाँ दे रहे है कि किसानों को किस तरह मछली के स्वास्थ्य का ध्यान रखना है । अधिक जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें 

जलडेगा प्रखंड के करमापानी दिगवार टोली में राजू बड़ाइक के घर को मंगलवार की रात झूठ से बिछडे एक हाथी ने नुकसान पहुंचा था बुधवार की रात पुनः हाथी ने राजू बड़ाइक के घर को क्षतिग्रस्त कर दिया

सिमडेगा जिले में लगातार चार दिनों से हो रही बारिश से जन जीवन अस्त व्यस्त हो गया है बारिश वह हवा से तापमान में गिरावट आई है तापमान में गिरावट आने के कारण लोगों को ठंड का एहसास होने लगा है लोगों को गर्म कपड़े को फिर से निकलना पड़ रहा है

जलडेगा ओडगा ओपी अंतर्गत झारखंड ओडिशा बॉर्डर ढेलसेरा चेक पोस्ट में लोकसभा चुनाव के मद्देनजर वाहनों की चेकिंग अभियान तेज कर दी गई है

ठेठईटांगर एनएच मुख्य पथ जोराम में सड़क किनारे लगी हाय मास्त लाइट कई माह से खराब पड़ी है एन एच 143 मुख्य पथ बोलबा आंबापानी मोड़ के समीप 2 वर्ष पहले हाई मास्ट लाइट लगाई गई थी

कुरडेग थाना परिसर में होली पर्व को लेकर शांति समिति की बैठक मजिस्ट्रेट किरण डांग की अध्यक्षता में हुई बैठक में बीडीओ गौरी शंकर शर्मा थाना प्रभारी विनायक कुमार पांडे ने होली पर्व आपसी भाईचारे के साथ बनाने की बात कही

ठेठईटांगर में लोकसभा चुनाव की तिथि की घोषणा के साथ अपराध नियंत्रण को लेकर जोराम आंबा पानी मोड़ के समीप वाहन चेकिंग अभियान चलाया गया

दहेज में परिवार की बचत और आय का एक बड़ा हिस्सा खर्च होता है. वर्ष 2007 में ग्रामीण भारत में कुल दहेज वार्षिक घरेलू आय का 14 फीसदी था। दहेज की समस्या को प्रथा न समझकर, समस्या के रूप में देखा जाना जरूरी है ताकि इसे खत्म किया जा सके। तो दोस्तों आप हमें बताइए कि *----- दहेज प्रथा को लेकर आपके क्या विचार है ? *----- आने वाली लोकसभा चुनाव में दहेज प्रथा क्या आपके लिए मुद्दा बन सकता है ? *----- समाज में दहेज़ प्रथा रोकने को लेकर हमें किस तरह के प्रयास करने की ज़रूरत है और क्यों आज भी हमारे समाज में दहेज़ जैसी कुप्रथा मौजूद है ?

हम सभी रोज़ाना स्वास्थ्य और बीमारियों से जुड़ी कई अफवाहें या गलत धारणाएं सुनते है। कई बार उन गलत बातों पर यकीन कर अपना भी लेते हैं। लेकिन अब हम जानेंगे उनकी हकीकत के बारे में, वो भी स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मदद से, कार्यक्रम सेहत की सच्चाई में। याद रखिए, हमारा उद्देश्य किसी बीमारी का इलाज करना नहीं, बल्कि लोगों को उत्तम स्वास्थ्य के लिए जागरूक करना है। सेहत और बीमारी को लेकर अगर आपने भी कोई गलत बात या अफवाह सुनी है, तो फ़ोन में नंबर 3 दबाकर हमें ज़रूर बताएं। हम अपने स्वास्थ्य विशेषज्ञों से जानेंगे उन गलत बातों की वास्तविकता, कार्यक्रम सेहत की सच्चाई में।