महिलाओं के पास भी अपनी सम्पत्ति होनी चाहिए जिससे उनका कोई शोषण न कर सके। पुरुषों की तुलना में महिलाओं को बहुत कम अधिकार हैं। अधिकार हैं, लैंगिक असमानता मुख्य कारण है, भूमि और प्रकृति संसाधनों के समान अधिकारों के बिना लैंगिक समानता हासिल नहीं की जा सकती है, आज भी हमारा समाज पुरुष प्रधान है, आज भी हमारा समाज पुरुष प्रधान है। इसके अलावा, अपने पिता या पति की पहचान करना बहुत महत्वपूर्ण है, पति या पिता के नाम के बिना, महिला समाज एक महिला को स्वीकार नहीं करता है। जो आज भी हमारे रीति-रिवाजों और कानूनों को अधिकार देगा, वह महिलाओं को अधिकार देने में संकोच करता है। समाज में महिलाओं का काम सिर्फ घर चलाना है, बच्चे का जन्म सिर्फ दो काम हैं जिन्हें अधिक शुद्धता दी जाती है और समाज में एक महिला समाज से अधिक घृणित है।

साथियों, हमें बताएं कि क्या आपके क्षेत्र के सरकारी जिला अस्पतालों, उपस्वास्थ्य केन्द्रों, स्वास्थ्य केन्द्रों, आंगनबाडी में पानी की कमी है? क्या वहां प्रशासन ने पानी की सप्लाई व्यवस्था दुरूस्त नहीं की है? अगर अस्पताल में पानी नहीं मिल रहा है तो मरीज कैसे इलाज करवा रहे हैं? क्या पानी की कमी के कारण बीमार होते हुए भी लोग इलाज करवाने अस्पताल नहीं जा रहे? या फिर आपको अपने साथ घर से पानी लेकर अस्पताल जाना पड़ रहा है? अपनी बात अभी रिकॉर्ड करें, फोन में नम्बर 3 दबाकर.

सुनिए डॉक्टर स्नेहा माथुर की संघर्षमय लेकिन प्रेरक कहानी और जानिए कैसे उन्होंने भारतीय समाज और परिवारों में फैली बुराइयों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई! सुनिए उनका संघर्ष और जीत, धारावाहिक 'मैं कुछ भी कर सकती हूं' में...

"गांव आजीविका और हम" कार्यक्रम के तहत हमारे कृषि विशेषज्ञ कपिल देव शर्मा पौधों में बोरोन की कमी और अधिकता के लक्षण के बारे में जानकारी दे रहे हैं । अधिक जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें

सुनते है बच्चों के लिए बना ये प्यारा सा गाना, जिसमें बात हो रही है सेहतमंद खाने और साबुन से हाथ धोने की। ये गाना आपके बच्चों को कैसा लगा? आप अपने बच्चों को किस तरह का पौष्टिक खाना देते है? क्या आप उन्हें खाने से पहले साबुन से हाथ धोने के लिए कहते है? हमें बताएं फोन में नंबर 3 दबाकर।

उत्तरप्रदेश राज्य से पूनम वर्मा ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि आजकल महिलाओं की पहचान इतनी बढ़ गई है कि महिलाएं हर चीज में आगे हैं। मान लीजिए कि डी. डी. एस. का कोई पद चल रहा है, उसमें एक फॉर्म भरा जा रहा है, जिसमें मुखिया का नाम केवल महिला है, कार्ड उनके नाम से भरना है, उनका आधार मोबाइल लगता है। वह अपने पति से आगे रहती है और जन्म तिथि से पहले महिला का नाम लिखा जाता है, उसके बाद वह क्या करना चाहती है, वह कितना पढ़ती है, यह भी लिखा जाता है।

"गांव आजीविका और हम" कार्यक्रम के अंतर्गत कृषि विशेषज्ञ जीव दास साहू , मानसून पूर्व पौधो की नर्सरी लगाने के बारे में जानकारी दे रहे हैं।नर्सरी लगाने में किसानों को कुछ बातों का ध्यान रखना ज़रूरी है। इसकी पूरी जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें.

सुनिए डॉक्टर स्नेहा माथुर की संघर्षमय लेकिन प्रेरक कहानी और जानिए कैसे उन्होंने भारतीय समाज और परिवारों में फैली बुराइयों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई! सुनिए उनका संघर्ष और जीत, धारावाहिक 'मैं कुछ भी कर सकती हूं' में...

नाम राजन पिता का नाम इंद्रपाल मोबाइल नंबर है 9628 7167 88

Transcript Unavailable.