बनारस रेल इंजन कारखाना में स्वास्थ्य केंद्र में वृक्षारोपण कर एक पेड़ मां के नाम लगाओ अभियान की शुरुआत की गई इस अवसर पर कई स्कूलों के द्वारा वृक्षारोपण किया गया और जिस प्रकार से हर व्यक्ति के जीवन में मां का महत्वपूर्ण योगदान होता है उसी प्रकार हम पर्यावरण के प्रति भी समर्पित भाव से पौधारोपण के माध्यम से कर रहे हैं इसके साथ ही वृक्षारोपण कार्यक्रम के लिए लोगों को जागरूक किया गया और कहां गया कि वृक्षारोपण करो मानव जीवन बचाओ और लोगों को यह संदेश दिया गया कि वृक्षारोपण कर धरती को हरा-भरा बनाएं जिससे आने वाली समस्याओं और रोगों से बचा जा सके तो वही इसके साथ यह संदेश भी दिया गया कि पेड़ लगाए ही नहीं बल्कि उसका संरक्षण करें

आज देखा जाए तो पर्यावरण तेजी से परिवर्तित हो रहा है। आने वाले समय में इसका दुष्परिणाम हो सकता है। पर्यावरण अगर संतुलित रहेगा तो आने वाली समस्या अपने आप ही रास्ता बना लेगी अगर सभी लोग पेड़ पौधे लगाए तो आने वाली समस्याओं से हम बच सकते हैं। जिससे मानव शरीर में ऑक्सीजन की कमी नहीं होगी इसके साथ ही हम सभी लोगों की यह जिम्मेदारी होती है। कि पेड़ लगाना ही नहीं उसे बचाना हमारा प्राथमिकता होना चाहिए

उत्तर प्रदेश राज्य के गोरखपुर जिला से से आकांक्षा श्रीवास्तव ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि प्रत्येक लड़के और लड़की के समग्र विकास में तेजी से प्रगति होनी चाहिए प्रत्येक बच्चे को अपनी क्षमता का एहसास करने का अधिकार है वे लैंगिक असमानता के दुष्चक्र के साथ-साथ भारत में लड़कियों और लड़कों के बीच लैंगिक असमानता के कारण ठीक से नहीं पनपते हैं, न केवल उनके घरों और समुदायों में बल्कि हर जगह लिंग असमानता दिखाई देती है। जैसा कि पाठ्यपुस्तकों में परिलक्षित होता है। फिल्में, मीडिया आदि, हर जगह उनके संबंधों के आधार पर भेदभाव किया जाता है, न केवल देखभाल करने वाले पुरुषों और महिलाओं के साथ भी भेदभाव किया जाता है, भारत में लैंगिक असमानता भी अवसरों में असमानता पैदा करती है जो दोनों लिंगों को प्रभावित करती है लेकिन आंकड़ों में प्रतिबिंबित नहीं होती है।

सुनिए डॉक्टर स्नेहा माथुर की संघर्षमय लेकिन प्रेरक कहानी और जानिए कैसे उन्होंने भारतीय समाज और परिवारों में फैली बुराइयों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई! सुनिए उनका संघर्ष और जीत, धारावाहिक 'मैं कुछ भी कर सकती हूं' में...

"गांव आजीविका और हम" कार्यक्रम के तहत हमारे कृषि विशेषज्ञ कपिल देव शर्मा नींबू के फसल के बारे में जानकारी दे रहे हैं। विस्तारपूर्वक जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें

उत्तर प्रदेश राज्य से अमित शर्मा मॉविले वाणी के माध्यम से बता रहे है कि मानव जाति के लिए यह चेतावनी है कि कुदरत का अंधा धुंध दोहन बंद कर अपनी विलासिता पूर्ण जिंदगी पर लगाम लगाए ताकि वातावरण के तापमान को नियंत्रित किया जा सके। जिससे हम ग्लोबल वार्मिंग के खतरे से बच सकें। अप्रत्याशित मौसम बदलाव का असर जहां हमारी खाद्य सुरक्षा को जोखिम में डाल रहा है, वहीं तमाम तरह की बीमारियों को भी जन्म दे रहा है।

मोटाभाई ने महज एक शादी में जितना खर्च किया है, वह उनकी दौलत 118 बिलियन डॉलर का 0.27 है। जबकि उनकी दौलत कृषि संकट से जूझ रहे देश का केंद्रीय बजट का 7.5 प्रतिशत से भी कम है। जिस मीडिया की जिम्मेदारी थी कि वह लोगों को सच बताएगा बिना किसी का पक्ष लिए, क्या यह वही सच है? अगर हां तो फिर इसके आगे कोई सवाल ही नहीं बनता और अगर यह सच नहीं तो फिर मीडिया द्वारा महज एक शादी को देश का अचीवमेंट बताना शुद्ध रूप से मुनाफे से जुड़ा मसला है जो विज्ञापन के रुप में आम लोगों के सामने आता है। क्योंकि मीडिया का लगभग पचास प्रतिशत हिस्सा तो मोटाभाई का खुद का है और जो नहीं है वह विज्ञापन के लिए हो जाता है "कर लो दुनिया मुट्ठी में” की तर्ज पर। दोस्तों, इस मुद्दे पर आप क्या सोचते है ?अपनी राय रिकॉर्ड करें मोबाईलवाणी पर, अपने फोन से तीन नंबर का बटन दबाकर या फिर मोबाईल का एप डाउनलोड करके।

उत्तर प्रदेश राज्य से अमित शर्मा मॉविले वाणी के माध्यम से हमारे श्रोता की बात कि , उन्होंने बताया की पर्यावरण मानव शरीर की आत्मा है, ऐसे में पर्यावरण की स्थिति विकराल रूप ले सकती है। विकास के कार्यों के साथ पेड़ों को अंधाधुन काटा जा रहा है ऐसे में प्राकृतिक संतुलन काफी हद तक बिगड़ रहा है। यही कारण है कि गर्मी तेज और बारिश का पता नहीं चल रहा है कहीं न कहीं पर्यावरण संतुलन बिगड़ रहा है। तो ऐसी स्थिति में हमें गंभीरता से लेना चाहिए और इसके साथ ही पर्यावरण की सुरक्षा के लिए हमें एक-एक पेड़ लगाना चाहिए जिससे पर्यावरण का संतुलन बना रहे और मानव जीवन सुरक्षित रहे।

उत्तर प्रदेश राज्य के गोरखपुर जिला से से आकांक्षा श्रीवास्तव ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिलाओं को भूमि अधिकार मिलने चाहिए यह एक बहुत ही प्रासंगिक प्रश्न है क्योंकि जहां महिलाओं के अधिकारों का संबंध है, समाज का भी है। वे चुप रहते हैं क्योंकि वे सोचते हैं कि अगर महिलाओं को उनके अधिकार मिलते हैं, तो वे आगे बढ़ेंगी और यह हमारे नियंत्रण में नहीं है। महिलाओं को शादी से पहले या शादी के बाद अपनी पैतृक भूमि पर पूरा अधिकार है, जैसे बेटों को अधिकार है, वैसे ही बेटियों को भी समान अधिकार हैं। यह लागू किया गया है कि अब उनकी बेटियों को पिता की जमीन पर बेटे और बेटियों के समान अधिकार होगा क्योंकि अगर लड़कियों को जमीन पर अधिकार मिलता है, तो इससे उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। वह अपनी वसीयत की मालिक होगी, वह जो चाहेगी वह करेगी, यह विचार का विषय है कि अगर पिता जीवित नहीं है, तो क्या उसके भाई उसे जमीन का अधिकार देंगे, भले ही वे देना न चाहें। इसलिए यह कानून है कि लड़के उस अधिकार को ले सकते हैं क्योंकि ऐसा हमेशा से रहा है कि पुरुषों ने हमेशा महिलाओं को खुद के बजाय कमजोर के रूप में देखा है। क्योंकि वह यह नहीं सोचते कि अगर एक महिला शिक्षित होगी तो वह अपने अधिकार के लिए लड़ेगी, तो हमारा समाज आगे बढ़ेगा, हमारा देश आगे बढ़ेगा और उन्हें भी समाज में पूरी समानता मिलेगी। पुरुष सोचते हैं कि अगर हम महिलाओं को यह अधिकार देंगे तो उन्हें नुकसान होगा। उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। ससुराल वालों को भी अपनी बहू को अपनी संपत्ति और पैतृक भूमि पर अधिकार देना चाहिए। माता-पिता को अपनी बेटियों को शिक्षा के अधिकार जैसे अधिकार देने से वंचित नहीं करना चाहिए। आज हमारी महिलाएं शिक्षा के क्षेत्र में कितनी आगे आई हैं। वे बड़े पदों पर काम कर रहे हैं। यह बंद हो जाता था, लेकिन बाद में हमारी सरकार ने ऐसे कई स्कूल, ऐसी नौकरियां रखी हैं, ताकि महिलाएं आगे बढ़ सकें और वे समाज में पुरुषों के बराबर हो सकें।

उत्तर प्रदेश राज्य के मिर्जापुर जिला से हमारे श्रोता ने मोबाइल वाणी के माध्यम से रमा से बातचीत की। रमा का कहना है कि महिलाओं को जमीनी अधिकार मिलना चाहिए। महिलाओं को शिक्षित होना चाहिए ताकि उन्हें अधिकार मिल सके। उनका कहना है उनके पति के नाम से उन्हें जाना जाता है। उनके पति ने जमीन उनके नाम पर कर दिया है ताकि वे आत्मनिर्भर बन सके