उत्तरप्रदेश राज्य के बलरामपुर जिला से पूनम सिंह उत्तरप्रदेश मोबाइल वाणी के माध्यम से बाल शिक्षा के बारे में यह कहती हैं कि वह बच्चे जो किसी भी विषय पर सही नहीं कर पाते हैं। इसका कारन यह है कि स्कूलों में शिक्षक के न होने से पढाई में बहुत ही ज्यादा प्रभावित होती है। उन्होंने यह बताया कि बच्चों के गणित और भाषा के बुनियादी कौशलों का विकास नहीं हो पा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि लड़कियों के स्कूल छोड़ने का कारण माता-पिता की खराब वित्तीय हालत होने कारन होता है। जिसका मतलब हो सकता है कि माता-पिता स्कूल खर्चे जैसे किताबें स्कूल आने-जाने का खर्च नहीं उठा पा रहे हैं और उन्हें आर्थिक सहयोग की जरूरत पड़ती है
उत्तरप्रदेश राज्य के बलरामपुर जिला से कीर्ति सिंह उत्तरप्रदेश मोबाइल वाणी के मध्य से नवजात शिशु की सुरक्षा के बारे में जानकारी देते हुए यह बता रही हैं कि नवजात शिशु के जन्म और जीवन की सबसे अधिक संवेदनशील पहले सप्ताह के बीच में होती है। उन्होंने बताया कि नवजात शिशु सुरक्षा बहुत ही ध्यानपूर्वक किया जाता है और बच्चों की देखभाल बहुत ही साफ सफाई से करनी चाहिए तथा मां को वही भोज पदार्थ दिए जाने चाहिए जिससे बच्चा स्वस्थ रहें। उन्हें इसे किसी भी प्रकार की हानि ना हो और निमोनिया जैसे कई बीमारियां घेर लेती हैं। इससे बचने के लिए साफ-सफाई अधिक जरूरी होता है तथा बच्चों का खानपान के लिए सबसे पहले डॉक्टर से संपर्क कर लेना चाहिए और जानकारी लिए बिना कोई भी काम नहीं करना चाहिए
स्वास्थ्य का महत्व
बाल स्वच्छता
उत्तरप्रदेश राज्य के बलरामपुर जिला से कीर्ति सिंह उत्तरप्रदेश मोबाइल वाणी के माध्यम से गर्भवती महिला की देखभाल के बारे में जानकारी देते हुए यह कहती हैं कि प्रेगनेंसी के समय पौस्टिक आहार लेने से बच्चे के मस्तिष्क के सही विकास होने में मदद मिलती है और जन्म के समय शिशु का वजन भी ठीक रहता है। संतुलित आहार से बच्चे में जन्म विकार प्रेगनेंसी में अमोनिया मॉर्निंग सिकनेस में भी बचाव होता है। उन्होंने बताया कि महिलाओं को फोलिक एसिड लेने की सलाह देते हैं डॉक्टरों की माने तो प्रेगनेंसी के शुरुआती महीनों में किसी महिला को ज्यादा भीड़ भाड़, प्रदूषण और रेडिएशन वाली जगह पर जाने से ज्यादातर बचना चाहिए, क्योंकि इसके अलावा उबड़ खाबड़ रास्तों पर सफर करना लंबे समय तक खाली पेट लेना और अधिक मिर्च का सेवन करने से बचना चाहिए क्योंकि यह सारी चीजें प्रेग्नेंसी के लिए घातक नहीं जाती है जिसका असर सीधा बच्चे पर पड़ता है
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती जिला से आदर्श श्रीवास्तव उत्तरप्रदेश मोबाइल वाणी के माध्यम से ग्राम प्रधान से साक्षात्कार किया। जिसमे ग्राम प्रधान जी ने बताया कि वह अपने ब्लॉक के अधिकारीयों को अपने आस पास फैले गन्दगी की सफाई के लिए आवेदन दिया था। लेकिन अभी तक कोई भी करवाई नहीं की गई है
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती जिला से अरविंद श्रीवास्तव उत्तप्रदेश मोबाइल वाणी के माध्यम से आरम्भिक बाल विकास पर ध्यान देने के बारे में जानकारी देते हुए यह कहते हैं कि जीवन से पहले दो वर्ष आरंभिक बाल विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बच्चे जो कुछ भी सीखते हैं वह जीवन के इन्ही शुरुआती वर्षों में ही सीखते हैं, जैसे बच्चे बड़े होते हैं बातचीत करना चलना दौड़ना और सोचना और समस्याओं को हल करना सीखते हैं। उन्होंने बताया कि यह बदलाव बच्चे के विकास को दर्शाता है लड़की और लड़का दोनों को सामान वृद्धि एवं विकास के लिए परिवार से एक जैसे कि ध्यान और देखभाल की आवश्यकता होती है। बचपन में आरंभिक अवध में उचित वृद्धि और मस्तिष्क के विकास का माता-पिता देखभाल कर्ताओं द्वारा उपलब्ध कराए गए निम्नलिखित सहायक वातावरण से निकटतम संबंध होती है। बच्चे के साथ खेलना संवाद करना बातचीत करना और मुस्कुराना।
उत्तप्रदेश राज्य के बलरामपुर जिला से पूनम सिंह उत्तप्रदेश मोबाइल वाणी के माध्यम से स्वच्छता के बारे में जानकारी देते हुए यह कहती हैं कि हमारे जीवन में स्वच्छता का बहुत ही महत्वपूर्ण हैं। इसलिए हमें स्वच्छता पर पूरा ध्यान देना चाहिए। जिससे की हमें किसी भी प्रकार की बीमारी से ग्रस्त न हो पाए
उत्तरप्रदेश राज्य के बलरामपुर जिला से ज्योति सिंह उत्तरप्रदेश मोबाइल वाणी के माध्यम से पोषण के बारे में जानकारी देते हुए यह कहती हैं कि भोजन के मुख्य पोषक तत्वों के नाम होते हैं जैसे कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन तथा खनीज है। उन्होंने बताया कि उनके अतिरिक्त भोजन में अहारी रिशु तथा जल्दी होता है, हालांकि जीवन के पहले 2 वर्षों में शिशुओं के लिए स्तनपान ही पोषक तत्वों का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत होता है। उन्होंने यह भी बताया कि इसमें यह सलाह दी जाती है कि पूरक आहार के साथ-साथ स्तनपान कम से कम 2 वर्ष की आयु तक जारी रखना चाहिए। साथ ही खराब पोषण बच्चों में बीमारियां और उनकी मृत्यु होने की भर्ती घटनाओं का एक प्रमुख कारण है बच्चों के पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन और कैलोरी आवश्यक होता है
