जाति आधारित सर्वे अगर नहीं होता तब यह पता नहीं चलता की बिहार की सभी जातियों को मिलाकर 94 लाख ऐसे लोग हैं जिनके जीविकोपार्जन का कोई आधार नहीं।अब उन्हें आत्मनिर्भर किया जाएगा ।यह योजना इस लक्ष्य को पूरा करने में लगभग 5 वर्ष का समय लग जाएगा ।