सोनपुर राष्ट्र पुनर्निर्माण में देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद की अहम योगदान का यह देश हमेशा ऋणी रहेगा। डॉ राजेंद्र प्रसाद देश को स्वाधीन करने के लिए सतत संघर्षशीलता के साथ-साथ भारत की वैधानिक परंपराओं के निर्माण करता थे। उक्त बातें पहलेजाघाट ओपी के पूर्व प्रभारी विश्वमोहन राम ने रविवार को भारत रत्न देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद के जयंती समारोह में अपने संबोधन में बताएं। अमर शहीद खुदीराम बोस एवं भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद की जयंती समारोह में डॉ राजेंद्र प्रसाद के तैल चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए कहा कि डॉ राजेंद्र प्रसाद को 1962 में अपने राजनीतिक और सामाजिक योगदान के लिए भारत के सर्वश्रेष्ठ नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाजा गया था ।वे सादगी पसंद दयाल एवं निर्मल मन के महान व्यक्ति थे। डॉ राजेंद्र प्रसाद छात्र जीवन में ही अलौकिक प्रतिभा के धनी व्यक्ति थे वह दूरदर्शी व सच्चा राष्ट्रभक्त के साथ-साथ सादगी और क्रमशीलता के प्रति मूर्ति थे।उनके सादा जीवन उच्च विचार और उनके बताए रास्ते पर चलने का युवाओं को अवाहन किया ।विस्तृत जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें।
