विश्व प्रसिद्ध हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेले में बच्चों से लेकर नौजवान, बूढ़े के हर मनपसंद चीज की बिक्री होती है और अपने-अपने समर्थ के अनुसार बच्चों से लेकर नौजवान, बूढ़े सामानों को खरीद कर घर ले जाते हैं वही सोनपुर मेले में सबसे बच्चों को आकर्षित कम दाम में बच्चों के अभिभावक बच्चों को बहला फुसलाकर उन्हें मिट्टी के बने सिटी और धिरनी खरीद कर देने से भी नहीं चूकते हैं और इससे बच्चे काफी खुश हो जाते हैं और पूरे मेले में सीटी बजा- बजाकर लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर देते हैं । सोनपुर मेले का प्राचीन मिट्टी की सिटी और धिड़नी आजादी के 75 वर्ष बाद भी अपनी पहचान बनाये हुए है। मेले में इसका करीब 100 विक्री केन्द्र है। विक्रेता सभी अतिगरीब हैं जो निकटम जिला वैशाली के हाजीपुर शहर सहित अन्य जगहों से आते हैं। इसके विक्रेता सड़क किनारे मटमैला चादर बिछाकर उसके आगे बांसका छोटी टोकड़ी या चादर पर ही रखकर बेचते हैं। सभी स्तर के लोग मिट्टी की सीटी और घिड़नी खरीद रहे हैं। हाँ। सच तो यह है कि मेला में आये विदेशी पर्यटक भी इस अनोखे और अलबेला चीज देखकर दुकान के सामने ठुमक जाते हैं तथा अपने देश खरीद कर ले जा रहे हैं । कई महिला एवं बच्चों वृद्ध इस मिट्टी के बने गिनी और सिटी के बारे में बताया कि पहले जितनी सिटी घिड़नी बिकती थी उतनी अब नहीं बिक रही है लेकिन आज भी बच्चे एवं उनके अभिभावक मेला से कम दाम में बच्चों के मनोरंजन के लिए घिड़नी और सिटी खरीद कर ले जाने से नहीं छुपाते हैं । मिट्टी के बने सिटी और घिड़नी विक्रेता ने बताये की इतनी महंगाई में मिट्टी एवं अन्य सामग्री खरीद कर जितनी लागत होती है उतनी नफा नहीं होती है । आज भी मिट्टी के बने घिड़नी और सिटी ₹10 में 4 बिक्री होती है जिसमे 2 सिटी व 2 घिड़नी बिक्री कर किसी तरह से अपना जीवकोपार्जन चलाते हैं । सरकार के तरफ से कुम्हारों लोगों के लिए कोई सहायता नहीं मिलती है। जिसके कारण अपना पुश्तैनी धंधा बरकरार रख कर अपने परिवार का किसी तरह से भरण पोषण करते हैं।विस्तृत जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें।