सोनपुर हिंदू धर्म में कोई ऐसा महीना नहीं है जिसमें व्रत या पर्व न हो. इसलिए भारत को पर्व, व्रत, त्योहार और रीति-रिवाजों का देश कहा जाता है । कार्तिक मास सबसे महत्वपूर्ण माह है जिसमे पारंपरिक विधि विधान के साथ लोक आस्था का महापर्व छठ के दूसरे दिन का अनुष्ठान खरना व्रत संपन्न हुआ । घर में आपसी सौहार्द ,प्रेम का नजारा दिखा । व्रतधारी ने मीठा के बने खीर, रोटी एवं केला के साथ केला के पतल पर प्रसाद सजाकर गृह देवता ,कुल देवता के साथ भगवान भास्कर व अपने इष्ट देवता के पूजा अर्चना के उपरांत कुछ क्षण उपरांत गंगाजल से,शुद्ध आचमन जल से समर्पित करने के बाद व्रतियों ने खुद प्रसाद ग्रहण किया उसके उपरांत ही परिवार और मित्रों के बीच खरना का प्रसाद का वितरण किया। जबकि स्थानीय प्रशासन ने भी व्रतियों और श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े इसके लिए छठ घाटों पर तैयारी कर ली है । छठ व्रतियों को किसी भी प्रकार की समस्या ना हो इसके लेकर जगह-जगह साफ- सफाई, रंगीन लाइट से पूरा सड़क मार्ग को जगमग रोशनी से सजावट किया गया है । व्रतधारियों ने अस्त चलगामी सूर्य की रविवार को संध्याकालीन व्रतधारी अर्ध देगी और अपने परिवार की सुख ,शांति की कामनाएं भगवान भास्कर से करेगी । बिहार के सबसे कठिन व्रत लोक आस्था का महापर्व छठ पर्व में लोग आपस में बैर , द्वेषता ,मतभेद को भूल जाते हैं और परस्पर प्रेम, सहयोग सेवा की भावना दिखती है। इस पर्व में सभी छठ व्रत धारी एवं उनके परिजन एक ही छठ घाट पर जाति धर्म भूलकर भगवान भास्कर को अर्ध देती है।ज़्यादा जानने के लिए इस ऑडियो को क्लिक करें।