मीडिया कर्मी की स्वतंत्रता होना बहुत जरूरी । पत्रकारों की सुविधा व सुरक्षा सरकार को देने की है जरूरत उक्त बातें रास्ट्रीय पत्रकारिता दिवस के मौके पर वरिष्ठ पत्रकार --सुरेंद्र मानपुरी ने कहा वही भ्रष्टाचार्यों, माफियाओं व सरकार के गलत नीतियों पर सवाल उठाने वाले पत्रकारों के लिए जोखिम भरी है पत्रकारिता --संजीत कुमार सोनपुर। हरिहर क्षेत्र सोनपुर में 16 नंम्बर को राष्ट्रीय प्रेस दिवस के मौके पर सोनपुर अनुमंडल पत्रकार संघ के अध्यक्ष विश्वनाथ सिंह की अध्यक्षता में गुरुवार को मनाया गया। इस अवसर पर श्री सिंह ने उपस्थित पत्रकारों, साहित्यकारों, लेखकों,कवियों को संबोधित करते हुए कहा कि पत्रकार और साहित्यकार काम इस अर्थ में समान है कि दोनों समाज के यथार्थी को चित्रण करते है, किन्तु अंतर "यह है कि साहित्यकार कल्पना के सहारा लेता है जबकि पत्रकार को पूरी तरह से यथार्थ से जुड़ा रहना पड़ता है । जबकि खोजपूर्ण पत्रकारिता प्रेस के लिए अत्यंत आवश्यक है की जानकारी देते हुए अध्यक्ष ने कहा कि बिहार से हिन्दी के प्रथम दैनिक सर्व हितैसी और केसरी द्वारा स्वदेशी प्रचार और देश-प्रेम को खूब उभारा । भारत को आजादी दिलाने में पत्रकारों और साहित्यकारों की भूमिका का वर्णन करते हुए अध्यक्ष ने कहा कि इनके लेखनी के बदौलत ही देश भक्तों में जागृति आई और अंततः अंग्रेज को भागना पड़ा। अभी हरिहर क्षेत्र मेला लगने जा रहा है। मेला भी प्रचार- प्रसार में जितना पत्रकार की भूमिका होती है उतना किसी अन्य समाज या संग्रहण का नहीं होता। पत्रकार अपना खर्च से खबर का संकलन कर प्रेस तक पहुँचाता है। सरकार की खामियों को किनारे कर मेला में आकर्षण भरने का कार्य पत्रकार करता है। लेकिन प्रशासन और सरकार द्वारा पत्रकारों के लिए कोई सुरक्षा की व्यवस्था नहीं किया जाता है। सच तो यह है कि मेला समापन के दिन प्रत्येक अधिकारी जिला से लेकर प्रखंड तक खुले मंच से सम्मानित होते हैं लेकिन 32 दिनों तक अखवार का पन्ना सिर्फ मेला के खबर से भरने वाला पत्रकार को सम्मानित करना तो दूर रहा , सम्बोधन में न तो पत्रकार का नाम लिया जाता है और न हीं अखबार का नाम लिया जाता है । पत्रकारिता दिवस कार्यक्रम में उपस्थित पत्रकार शंकर सिंह, अभय कुमार सिंह, सुनील यादव,संजीत कुमार, मनीष कुमार , विपिन कुमार ,वैभव सिंह,गौतम कुमार ,ललित शर्मा, एस.पी. सिंह सहित समाजसेवी लालबाबू पटेल,प्रभात रंजन, हरेन्द्र साह , नीतीश कुमार ,सहित अन्य लोग को उपस्थिति में वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र मानपुरी ने कहा कि मीडिया और प्रशासन के बीच तालमेल होना जरूरी है ताकि पत्रकार जो खबर छापे उस पर अमल किया जाए । उन्होंने कहा कि आजादी के पहले और बाद में भी लोगों में अलख जगाने की बड़ी भूमिका मीडिया की होती है लेकिन इस मिशन की परिस्थिति हमेशा जटिल रही है। कहने को तो देश में चौथा स्तंभ है लेकिन आज स्थिति है कि मीडिया कर्मी हमेशा से असुरक्षा महसूस करती है जो देश के लिए चिंता का विषय है । मीडिया कर्मी की स्वतंत्रता होना बहुत जरूरी है। पत्रकारों की सुरक्षा ,सुविधा व स्वतंत्रता देने की जरूरत सरकार को सबसे ज्यादा जरूरी है वही संजीत कुमार ने कहा कि भ्रष्टाचारियो, माफियाओं व सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने वाले पत्रकारों के लिए जोखिम भरी पत्रकारिता है जो देश और राज्य ,समाज के लिए खतरे की घंटी है । आजादी के बाद प्रेस और कोर्ट की महत्वपूर्ण भूमिका बन गई है ।लोकतंत्र में पत्रकार भी सुरक्षित नहीं । मीडिया की स्वतंत्रता लोकतंत्र के लिए बहुत जरूरी है । वही अवध किशोर शर्मा ने कहा कि पत्रकार समाज की आईना होता है । पत्रकार आज भी स्वतंत्र ,निडर और निष्पक्ष होकर सच परोसने का काम करता है । पत्रकार किसी के अनहित नहीं करता है ,न हीं उनका दुश्मन है । आज स्थिति यह हो गई है कि बदलते परिपेक्ष के साथ अब तो खबर छाप देने या जनता व सरकार तक सही खबर पहुंचाने के बाद पत्रकारों को धमकी मिलती है। कहीं-कहीं पर हत्या कर देते हैं या मानहानि का केस कर देते हैं या किसी केस के माध्यम से बदले की भावना से कैसे में फंसा देने की धमकी मिलती हैं । जिसके कारण पत्रकारिता का स्तर धीरे धीरे गिर रही है जो देश और राज्य और समाज के लिए खतरे की इशारे कर रही है । इस पर सरकार को चिंतन करते हुए पत्रकारों की सुविधा व सुरक्षा की व्यवस्था करने की जरूरत है । तभी निष्पक्ष पत्रकारिता सफल होगी और समाज के आगे सही परोसने की लिए पत्रकार की स्वतंत्रता होना बहुत जरूरी है।
