बिहार के प्रशिद्ध त्योहार छठ महापर्व का अथ कुछ ही दिन रह गए है। पर्व को लेकर लोगों में काफी उत्साह का माहौल बना हुआ है । बिहार के लोग अन्य प्रदेशों में जाकर अपना जीवकोपार्जन के लिए रहने वाले लोग दीपावली व छठपर्व को लेकर अपने घर लौट रहे हैं । सोनपुर प्रखंड क्षेत्र के नगर से लेकर ग्रामीण लोग अपने- अपने घरों को रंगाई पोताई के साथ-साथ साफ सफाई एवं घरों व दुकानों, कार्यालय सजाने में लगे हुए है। छठ पर्व 17.11.23 से शुरू हो रही चार दिवसीय छठ पर्व को लेकर मल्लिक परिवार के लोग अपने-अपने परिवार के साथ सुबह से ही सूप, दाउरा व डाला बनाने में जुटे हुए है। अपने परिवार के लिए भोजन बनाने के बाद शाम तक काम में लगी रहती है। सूप निर्माण कर रही कारीगर ने बताया कि एक माह पूर्व से सूप बनाने में जुटे है। वही हरिजन बस्ती में रहने वाले पासवान व चमार के लोग बाँस के दउरा बनाने में लगे हुए हैं । छठ पर्व को लेकर हरिजन बस्तियों में चहल-पहल बढ़ गयी है। प्रत्येक घर में दउरा व सुपली बनाने का काम तेजी से चल रहा है। दउरा बनाती महिलाओं ने बताती है कि सुपली व दउरा बनाने के लिए हमलोग सपरिवार लगे रहते हैं । बाँस के दामो में बढ़ोतरी होने के कारण सुप,दउरा के कीमत के बढ़ रहे हैं । पहले लोगों को फ्री में बाँस व बाँस के करची मिल जाती थी जिसके कारण दउरा,सुप के कम दामों में उपलब्ध होती थी लेकिन अब धीरे-धीरे बस के दामों में बढ़ोतरी के कारण सुप ₹100 से लेकर ₹200 तक के बिक्री हो रहे है वहीं दौउरा 150 रुपए से लेकर ₹400 तक की बिक्री हो रही है। सुप,दउरा या बाँस के बनने वाली समाग्री के निर्माण में जितनी मेहनत व सामान के लागत लगती हैं उतनी नफा नही होती हैं । मलिक समाज के लोगों ने बताया कि सुप के खरीदारी कम हो रही है। खासकर व्रतधारी पीतल के सूप खरीद कर उपयोग में ला रहे हैं । जिससे उनके जो वंशावली पेशा है उस पैसे से सही से दो वक्त की रोटी भी नसीब नहीं हो पाती है । किसी तरह से अपना परिवार के भरण पोषण कर रहे हैं । महंगाई इतनी चरम पर है कि छठवर्ती के परिवार अपने सामर्थ्य के अनुसार से पूजन सामग्री खरीद रहे हैं लेकिन व्रत धारी के तरफ से अब ऑडर भी मिल रहा है। उधर छठ के पूजन सामग्रियों में दउरा ,सूप सुपली की बिक्री पर्व नजदीक आते ही दिनों दिन सामान की बिक्री में तेजी आने लगी है।