सोनपुर विश्व विख्यात हरिहर क्षेत्र सोनपुर के नारायणी गंडक नदी के तट पर प्रतिष्ठित श्री गजेन्द्र मोक्ष देवस्थानम् नौलखा मन्दिर में कार्तिक मास के महत्व पर प्रकाश डालते हुए सोमवार को हरिहर क्षेत्र पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी लक्ष्मणाचार्य जी महाराज ने कहा कि यह महिना भगवान श्री दामोदर श्रीकृष्ण का बहुत प्रिय है।आध्यात्मिक ऊर्जा एवं शारीरिक शक्ति संग्रह करने में कार्तिक मासका विशेष महत्व है। इसमें सूर्य की किरणों एवं चन्द्र किरणों का पृथ्वी पर पड़ने वाला प्रभाव मनुष्य के मन मस्तिष्क को स्वस्थ रखता है। इसीलिए शास्त्रों में कार्तिक स्नान और कथा श्रवण महात्म्य पर विशेष जोर दिया गया है। आश्विन शुक्ल पक्ष से कार्तिक शुक्ल पक्ष तक पवित्र नदियों में सुबह में स्नान-ध्यान करना श्रेष्ठ माना गया है। श्री स्वामी लक्ष्मणाचार्य जी महाराज ने कहा कार्तिक माह में विष्णु,शिव, चण्डी, सूर्य तथा अन्य देवों के मंदिरों में दीप जलाने तथा प्रकाश करने के अलावा पुष्पों से अभिनन्दन करना चाहिए। इस कार्तिक मास में तुलसी के पौधे और आंवला के वृक्षों की सेवा एवं पूजा करने चाहिए।तुलसी पूजा का महत्व बताते हुए उन्होंने कहा कि तुलसी के पत्ते पंचामृत में डालने पर चरणामृत बन जाता है। तुलसी में अनन्त औषधीय गुण भी विद्यमान हैं। इसीलिए हमारे ऋषि-मुनियों ने इन्हें विष्णु प्रिया कहकर पूजनीय माना। देवशयनी एकादशी से देवोत्थान एकादशी तक छः माह तुलसी की विशेष पूजा होती है। कार्तिक में तो इनका अत्याधिक महत्व बढ़ जाता है। इस मास में आप जितना दान, तप, व्रत रखेंगे आपके ऊपर उतना ही श्री हरि विष्णु की कृपा जरूर होगी । कार्तिक माह के महत्व के बारे में स्कन्द पुराण,नारद पुराण, पद्म पुराण आदि धर्म ग्रंथों में देखने को मिलता है। कार्तिक माह में किए गये स्नान का फल, एक सहस्र बार किए गंगा स्नान के समान, सौ बार माघ स्नान के समान है। जो फल कुम्भ व् प्रयाग में स्नान करने पड़ मिलता है ।ज़्यादा जानने के लिए इस ऑडियो को क्लिक करें।
