आपदा प्राधिकरण के उपाध्यक्ष ने सोनपुर मेला क्षेत्र में लगाये गए प्रदर्शनी को किया अवलोकन, सोनपुर--- बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के पेवेलियन में हर दिन सैकड़ों की संख्या में लोग विभिन्न स्टॉल पर आकर बड़ी दिलचस्पी के साथ आपदा प्रबंधन से जुड़ी बारीकियां से लगायी गयी प्रदर्शनी को देख-समझ रहे हैं। साथ ही मेला क्षेत्र में घूम-घूम कर नुक्कड़ नाटक दल के कलाकार लोगों को आपदाओं में सुरक्षित रहने के लिए जागरूक कर रहे हैं। हैंडबिल, पंफलेट वितरण भी बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त यहां आनेवाले लोगों को स्वरोजगार से जुड़ी जानकारी भी मुहैया कराई जा रही है। प्राधिकरण की जेंडर इक्वैलिटी टीम का 'कबाड़ से जुगाड़' ऐसा ही एक अभियान है। रविवार को बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डाॅ. उदय कांत मिश्र ने मेला क्षेत्र में स्थित पेवेलियन का मुआयना किया। यहां मौजूद सारण जिला प्रशासन के अधिकारियों को पूूरे मेला क्षेत्र को आपदामुक्त रखने के लिए आवश्यक सुझाव दिए। बिजली के तार व उपकरणों तथा जेनरेटर पर विशेष नजर रखने की हिदायत दी। बाद में पेवेलियन में हर स्टॉल पर पहुंच मेलार्थियों को दी जा रही जानकारी को खुद देखा और परखा। रविवार को पेवेलियन में एसडीआरएफ, सिविल डिफेंस, बिहार अग्निशमन सेवा, सामुदायिक स्वयंसेवकों और प्राधिकरण के विशेषज्ञों ने बच्चों और आम लोगों को भूकंप, अगलगी, बाढ़, नाव दुर्घटना, वज्रपात, सड़क दुर्घटना, शीतलहर, सर्पदंश समेत अन्य आपदाओं में बचने की विस्तार से जानकारी दी। सड़क सुरक्षा और डूबने से होनेवाली मौत से जुड़े नाटक -जान है तो जहान है- का मंचन आपसदारी कला मंच के कलाकारों ने किया। एसडीआरएफ की टीम ने नाटक के माध्यम से सर्पदंश से बचाव के उपाय बताए। इससे जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने का प्रयास किया। बिहार अग्निशमन सेवा के पदाधिकारियों ने मॉक ड्रिल के जरिये आग से बचाव का संदेश दिया। घरों में गैस सिलिंडर में लगी आग पर कैसे काबू पाएं, इसे जानने-समझने में महिलाओं ने खासी दिलचस्पी दिखाई। महुआ, वैशाली की वर्षा रानी ने अग्निशमन पदाधिकारियों की निगरानी में खुद सिलिंडर में लगी आग पर काबू पाया। *:: हुनर सीख करें कमाई::* आपदाएं कई बार आजीविका को गहरे प्रभावित करती है। आर्थिक रूप से गरीबों की कमर तोड़ देती है। ऐसे में घर में पड़े कबाड़ के सामान भी आय का जरिया बन सकते हैं। जेंडर इक्वैलिटी के स्टाॅल पर मौजूद रश्मि वात्स्यायन और दिव्या यादव यही चीज आगंतुकों को बता-समझा रही हैं। सरसों तेल के पुराने पांच या दस लीटर के जार, बेकार पड़े सूप-दउरा पर आकर्षक कलाकृति उकेरी जा सकती है। कूची-कलम-कैंची से यह करके दिखाया जा रहा है। इसे सीखने के इच्छुक लोगों को पटना में निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसी तरह मिट्टी से कई उम्दा कलाकृति बनाकर राजकुमार ने दिखाया। पटना आर्ट काॅलेज के ग्रेजुएट राजकुमार मिनटों में किसी का भी बहुत शानदार पोट्रेट बना देते हैं। वे लोगों का इस कला से परिचय करा स्वावलंबन की राह पकड़ने को प्रेरित करते हैं।
