उत्तर प्रदेश राज्य के वाराणसी जिला से मोबाइल वाणी संवाददाता शैलेंद्र सिंह ने जानकारी दी कि जल संरक्षण एक बहुत ही महत्वपूर्ण मुद्दा है। उत्तर प्रदेश में कई ऐसी जगहें हैं जहां पानी की समस्या है जहां पीने योग्य पानी उपलब्ध नहीं है। इसलिए पानी को किस तरह से संरक्षित किया जाना चाहिए इस पर ध्यान देना चाहिए। पेड़ों की संख्या ज्यादा करनी होगी पेड़ लगाएं ताकि वातावरण संतुलित रहे। खेतों में ऊँचे मेड़ों की व्यवस्था की जानी चाहिए ताकि खेतों में जो पानी है वह ठहरे और इसका अधिक हिस्सा जमीन के अंदर अवशोषित किया जा सके। उत्तर प्रदेश के सभी क्षेत्रों में मिर्जापुर, सोनभद्र के साथ-साथ चंदौली जैसे कई अन्य क्षेत्र हैं, जहाँ लोग गड्ढे बनाते हैं। जिनमें पानी रुक जाता है, साथ ही साथ आवश्यकता के अनुसार लोग इससे सिंचाई आदि करते हैं। पानी का बहुत अधिक दोहन नहीं किया जाना चाहिए और लोगों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाना चाहिए। हालांकि सरकारी विभागों के माध्यम से भी लोगों को जागरूक किया जाता है। ताकि आने वाले समय में लोगों को पानी के संकट से बचाया जा सके और इसके साथ ही यह भी देखना चाहिए कि जहां धान के लिए उपयुक्त मिट्टी हो, वहां ही धान की खेती की जानी चाहिए। लोगों को रेन वॉटर हार्वेस्टिंग के प्रति जागरूक होना चाहिए
उत्तर प्रदेश राज्य के वाराणसी जिला से मोबाइल वाणी संवाददाता शैलेंद्र सिंह ने जानकारी दी कि महिलाओ के सशक्त होने से भारत मे बदलाव देखने को मिल रहे है। इसके साथ ही महिलायें पुरानी कुरीतियों को खत्म कर एक नई विचारधारा के साथ आगे बढ़ रही है। ट्रेन हो या विमान या उससे संबंधित अन्य सीमा सुरक्षा, अर्धसैनिक बल हर जगह महिला मौजूद हैं। हाशिए पर रहने वाली महिलाओं को निश्चित रूप से बदलाव आया है। इसके साथ ही घरेलू हिंसा में कमी आई है। महिला खुद के लिए अब आवाज उठा रही है। आर्थिक रूप से सशक्त हो कर परिवार की जिम्मेदारी उठा रही है। लेकिन फिर भी शिक्षा की दर को भी बढ़ाने की जरूरत है। ऐसे कई राज्य हैं जहां महिलाओं को अभी तक उस तरह से शिक्षित नहीं किया गया है जिस तरह से उन्हें होना चाहिए। महिलाओं का सशक्त होना मतलब भारत का विकास की ओर आगे बढ़ना
उत्तर प्रदेश राज्य के वाराणसी जिला से मोबाइल वाणी संवाददाता शैलेंद्र सिंह ने बताया कि इस साल गर्मी बहुत गर्मी पड़ी और भीषण गर्मी का रिकॉर्ड टूट गया है। बड़े वृक्षों जैसे -पीपल, बरगद, पाकड़, गुला आदि जैसे बड़े पेड़ों की संख्या में कमी आई है। विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।
उत्तर प्रदेश राज्य के वाराणसी जिला से मोबाइल वाणी संवाददाता शैलेंद्र सिंह ने बताया कि जल संरक्षण एक बहुत ही महत्वपूर्ण मुद्दा है जिसके बारे में लोगों को बहुत गंभीरता से सोचना चाहिए। समाज में लोगों को लोगों को जागरूक करना चाहिए। विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।
बनारस जिले में वृक्षारोपण की जरुरत है और वर्षा की शुरुआत वृक्षारोपण के लिए सबसे उपयुक्त है।
उत्तरप्रदेश राज्य के वाराणसी जिला से रमेश मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे हैं कि भारत में लैंगिक असमानता आज से नहीं बल्कि बहुत पुराने समय से चल रही है। लड़कों द्वारा चार लड़कियों को दरकिनार करना प्राचीन काल से यहाँ की बुराइयों में से एक माना जाता है। भारत जैसे देश में निरक्षरता का वर्चस्व था, जहां लोग लड़कों को ही सब कुछ मानते थे, लैंगिक असमानता एक बड़ी समस्या बन गई थी। पिछले कुछ वर्षों में सरकार की नीतियों, विशेष रूप से बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, को बेटियों को बेहतर वातावरण और समाज देने के लिए आगे लाया गया। आज सरकार ने व्यापक भ्रष्टाचार को दूर करने के लिए कई जागरूकता अभियान चलाए हैं कि न केवल बेटी बल्कि बेटा भी सब कुछ है। आज लोगों की मानसिकता में बदलाव आया है। लोग अब बेटियों को भी घर की लक्ष्मी मान रहे हैं, अगर यह स्थिति बनी रही तो लैंगिक असमानता में पीछे रह रहा भारत आने वाले कुछ समय में अन्य देशों को भी लैंगिक समानता के लिए प्रेरित करेगा।
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उत्तरप्रदेश राज्य के वाराणसी जिला से सुरेश कुमार मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे हैं कि जहां तक पानी की समस्या जो पूरी दुनिया में एक साथ बढ़ रही है इसको देखते हुए बड़े फैसले लेने की जरूरत है। कल तक, पानी के जो स्रोत थे कुएँ, तालाब, नदियाँ थीं जो प्राकृतिक रूप से हमे पानी देते थे।लेकिन अब जब बारिश ठीक से नहीं हो रही है तो पानी का संकट भी गहरा हो रहा है। तेजी से हो रहे शहरीकरण के कारण कुएं और तालाब भर रहे हैं, जिससे भूजल स्तर लगातार गिर रहा है, ऐसी स्थिति में जहां लोगों को कल तक जहां पचास फीट में ही स्वच्छ पेयजल मिलता था। अब लोगों को तीन सौ पच्चीस से सौ फीट अंदर जाकर पीने का पानी मिल रहा है, इसलिए अब ऐसा नियम बनाने की जरूरत है कि लोग अपने घरों में समरसेबल पंप लगा रहे हैं, जिससे पानी की भारी बर्बादी हो रही है।
उत्तर प्रदेश राज्य के वाराणसी जिला से मोबाइल वाणी संवाददाता शैलेंद्र सिंह ने बताया कि मनरेगा का सीधा लाभ ग्रामीण क्षेत्रों के पुरुषों और महिलाओं को देखने को मिला। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार का अवसर प्रदान करने के लिए सरकार द्वारा मनरेगा योजना लागू किया गया है। मनरेगा के अंतर्गत काम करने का पैसा सीधा मजदूर के अकाउंट में दिया जाता है। इस योजना में कई कमियां भी देखने को मिलने लगी। जैसे-कमीशनखोरी,मशीनों का प्रयोग,इत्यादि। विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।
उत्तरप्रदेश राज्य के वाराणसी जिला से गजेंद्र सिंह मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि जल संरक्षण बहुत महत्वपूर्ण है लेकिन सरकार के साथ-साथ आम जनता पर भी ध्यान देना महत्वपूर्ण है। जल संरक्षण के लिए सरकार द्वारा चलाई जाने वाली योजनाओं का दूर-दराज के गाँवों या कस्बों में अभी तक कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। जल स्तर अब बहुत नीचे जा रहा है। इस साल की भीषण गर्मी के दौरान वाराणसी के सभी गांवों के कुएं सूख गए हैं, जबकि हैंडपंपों में भी पानी का स्तर काफी नीचे चला गया है। सरकार जल निगम के माध्यम से हर गाँव में पीने का पानी पहुँचाने की कोशिश कर रही है, लेकिन जो योजना जमीन पर है वह अभी भी बहुत अपर्याप्त है। कागज पर, यह आंकड़ा सरकारी अधिकारियों द्वारा अतिरंजित किया गया है, जबकि वास्तव में, यह अभी भी वास्तविकता से बहुत दूर है। सबसे महत्वपूर्ण लक्षण यह है कि तालाबों में पानी गांवों में दिखाई नहीं दे रहा है। दूसरी ओर सरकार द्वारा बनाई गई नहरों को खोदा गया है। गाँव में जल स्तर पिछले कई वर्षों से बराबर नहीं होने के बावजूद काफी कम हो गया है, जबकि गाँवों में तालाबों में पानी की व्यवस्था नहीं की गई है। चूंकि पानी तालाबों तक नहीं पहुंच पा रहा है, इसलिए जहां तक शहरों का सवाल है, जहां तक गांवों का सवाल है, चौतरफा नवीनीकरण के बावजूद पानी की निकासी कैसे की जा रही है। काशी की प्रणाली तालाबों की ओर उन्मुख नहीं होने के कारण, तालाब हमेशा खाली रहते हैं। गाँवों या कस्बों में पानी बचाने का एकमात्र तरीका तालाबों का पुनर्निर्माण करना है और पानी की व्यवस्था करने के लिए सरकार द्वारा हर गांव में अमृत सरोवर बनाए गए थे, लेकिन वे कागज पर बनाए गए थे और उनमें पानी कहीं दिखाई नहीं दे रहा था।
