प्रधानमंत्री नागरिक सहायता एवं राहत फंड में 100 से अधिक सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों ने अपने कर्मचारियों के वेतन से 155 करोड़ रुपये की राशि दान की है. यह राशि इन पीएसयू द्वारा कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी फंड्स के तहत दान किए गए 2400 करोड़ रुपये के अतिरिक्त थी. इन पीएसयू में से कर्मचारियों के वेतन से सबसे अधिक दान ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन ने 29.06 करोड़ रुपये का किया. ओएनजीसी ने ही अपने सीएसआर फंड्स से सबसे अधिक 300 करोड़ रुपये की राशि दान की थी. इतना ही नहीं बीएसएनएल के कर्मचारियों ने भी 11.43 करोड़ रुपये का दान दिया. गठन के बाद से ही यह फंड अपने कामकाज में अत्यधिक गोपनीयनता बरतने को लेकर आलोचनाओं को घेरे में है. जहां कुछ लोग प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष के होते हुए दूसरा फंड गठित करने पर सवाल उठा रहे हैं तो वहीं कुछ लोग फंड की जानकारी सार्वजनिक न किए जाने पर भी आपत्ति जता रहे हैं. फंड को कानूनी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा, लेकिन अगस्त में सुप्रीम कोर्ट ने पीएमएनआरएफ में पीएम-केयर्स से पैसे ट्रांसफर करने की याचिका को खारिज कर दिया था. साथियों, क्या आपको लगता है कि यह दान कर्मचारियों की मर्जी से हुआ है? क्या इस फंड में दान के बाद देश में जरूरतमंदों तक मदद पहुंची, जैसा कि दावा किया जा रहा था? क्या आपको लगता है कि पीएम केयर्स फंड का सही इस्तेमाल हो रहा है? अपनी बात हम तक पहुंचाने के लिए फोन में अभी दबाएं नम्बर 3.

मोदी सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे देशव्यापी आंदोलन और न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानूनी अधिकार बनाने की बहस के बीच किसानों को पिछले दो महीने में एमएसपी से कम कीमत पर कृषि उपजों की बिक्री होने पर कम से कम 1,881 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर। 

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के एक नए अध्ययन में सामने आया है कि कोविड-19 महामारी के गंभीर दीर्घकालिक परिणामों के चलते 2030 तक 20 करोड़ 70 लाख और लोग घोर गरीबी की ओर जा सकते हैं और अगर ऐसा हुआ तो दुनिया भर में बेहद गरीब लोगों की संख्या एक अरब के पार हो जाएगी। विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर। 

सोशल मीडिया पर एक मैसेज वायरल हो रहा है. इसमें दावा किया जा रहा है कि मुकेश अंबानी कोरोना काल में बच्चों की ऑनलाइन एजुकेशन में मदद के लिए 555 रुपए का 3 महीने वाला जियो रीचार्ज मुफ्त दे रहे हैं। विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर। 

मोदी सरकार के विवादित कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे देशव्यापी किसान आंदोलनों के बीच हाल ही में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने केंद्र का समर्थन करते हुए कहा था कि उनकी सरकार ने साल 2006 में एपीएमसी एक्ट को खत्म किया था, जिससे बड़ी संख्या में किसानों को लाभ मिला है और अब इसी की तर्ज पर देश भर में ये कानून लागू किया जा रहा है। विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर। 

Transcript Unavailable.

देश के प्रमुख लेखक-सांस्कृतिक संगठनों ने किसान आंदोलन के प्रति एकजुटता जाहिर करते हुए 8 दिसंबर के देशव्यापी बंद को पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की है. न्यू सोशलिस्ट इनीशिएटिव, दलित लेखक संघ, अखिल भारतीय दलित लेखिका मंच, प्रगतिशील लेखक संघ, जन संस्कृति मंच, इप्टा, संगवारी, प्रतिरोध का सिनेमा और जनवादी लेखक संघ ने आज 6 दिसंबर को किसान आंदोलन की मांगों और 8 तारीख़ के भारत बंद के समर्थन में बयान जारी किया

फ़ेसबुक और ट्विटर पर एक वीडियो शेयर करते हुए दावा किया गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 राज्यों में लॉकडाउन की घोषणा की है. इस वीडियो में ब्रेकिंग न्यूज़ बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य कुछ केन्द्रीय मंत्रियों की तस्वीरें फ़्लैश हो रही हैं. वीडियो के बैकग्राउंड में वॉइस ओवर चल रहा है जिसमें दावा किया गया कि देश में दुबारा से लॉकडाउन जारी किया जाएगा. हालांकि आॅल्ट न्यूज ने इस मामले की जांच की तो पता चला कि पीएम मोदी ने ऐसी कोई घोषणा नहीं की है.विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर। 

कृषि कानूनों के विरोध में केंद्र सरकार और किसानों के बीच बैठक करीब आठ घंटे के बाद खत्‍म हुई है. कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि बातचीत सौहार्द्रपूर्ण वातावरण में हुई. फिलहाल दोनों के बीच बातचीत में कोई नतीजा नहीं निकल सका लेकिन दोनों पक्षों ने पाँच दिसंबर को एक बार मिलने का फैसला किया है.विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर। 

देशभर में किसानों के समर्थन में वाम दलों ने प्रदर्शन किया। उनके इस प्रदर्शन में उनके सहयोगी जनसंगठन भी सड़क पर उतरे। दो दिन पहले ही सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी ने अपने कार्यकर्ताओ से सड़क पर उतरकर किसानों का साथ देने को कहा था। जिसके बाद से ही लगातर बंगाल, हिमाचल, बिहार, पांडुचेरी, तमिलनाडु, केरल, असम सहित देश के तमाम राज्यों में वाम दलों और उनके सहयोगी जनसंगठनों के लोगों ने किसानो के समर्थन में प्रदर्शन किया।विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।