उत्तर प्रदेश राज्य के ग़ाज़ीपुर जिला से महाबीर राजभर मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि दिव्यांग व्यक्ति के नाम से आवास आया है। घर बनाना बहुत महँगा हो गया है

उत्तर प्रदेश राज्य से हमारे संवादाता की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से सुनीता राजभर से हुई। सुनीता राजभर यह बताना चाहती हैं कि इनको आवास ,शौचालय और राशन कार्ड का लाभ नहीं मिला है। वह बहुत कष्ट में है

उत्तर प्रदेश राज्य से महाबीर राजभर मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि अरविन्द राजभर को आवास का सुविधा मिलने पर भी प्रधान जी पैसा मांगते हैं। अगर वह पैसा दे देंगे तो घर कैसे बन पायेगा

उत्तर प्रदेश राज्य के बलिया जिला के मऊ जनपद से महाबीर राजभर मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि इनके दोस्त के परिवार के लिए आवास आया था लेकिन ग्राम के प्रधान पैसा मांग रहे हैं

उत्तर प्रदेश राज्य के बलिया जिला से महाबीर राजभर मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि उनसे आवास के लिए पैसा माँगा जा रहा है

कल के नेता, आज की आवाज़” केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक आह्वान है—युवाओं के लिए, समाज के लिए और नीति निर्माताओं के लिए। यदि युवाओं को सही दिशा, प्रशिक्षण और अवसर दिए जाएं, तो वे भूमि न्याय के आंदोलन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकते हैं। भविष्य का भारत तभी सशक्त और न्यायपूर्ण होगा, जब आज की युवा आवाज़ भूमि पर समान अधिकार की मांग को मजबूती से उठाएगी। तब तक आप हमें बताइए कि , *--- आपके परिवार में जमीन किसके नाम है? क्या महिलाओं का नाम भी उसमें शामिल है *--- “हम अपने परिवार और समाज में ऐसी कौन-सी पहल कर सकते हैं, जिससे महिलाओं को ज़मीन में बराबर की हिस्सेदारी सुनिश्चित हो? *--- “अगर महिलाओं के नाम जमीन हो जाए, तो आपके हिसाब से उनकी ज़िंदगी में क्या-क्या बदल सकता है?”

उत्तर प्रदेश राज्य के गाजीपुर जिला से अजित राजभर ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि भारत सरकार ने महिलाओं को प्रत्येक योजनाओं में छूट दी है। जैसे - राशन कार्ड,गैस कनेक्शन,आवास,बिजली कनेक्शन , श्रम कार्ड,इत्यादि।फिर भी कहा जाता है कि महिलाओं के नाम सम्पत्ति नही किया जाता है। यह सरासर झूठ है।यदि विभाग देखा जाए तो पंचायत विभाग में भी महिलाएं हैं।महिलाओं के लिए ग्राम प्रधान का पद आरक्षित किया गया है।पुरुषों के नाम भारत सरकार ने क्या दिया है ?

परंपरा तभी बदलेगी, जब सोच बदलेगी। जब समाज यह समझेगा कि महिलाओं को भूमि और संपत्ति में समान अधिकार देना परिवार और राष्ट्र दोनों के हित में है, तभी भारत वास्तविक अर्थों में समानता और न्याय की दिशा में आगे बढ़ेगा। तब तक आप हमें बताइए कि , *---- आपके परिवार में जमीन किसके नाम है? क्या महिलाओं का नाम भी उसमें शामिल है *---- हम अपने परिवार और समाज में ऐसी कौन-सी पहल कर सकते हैं, जिससे महिलाओं को ज़मीन में बराबर की हिस्सेदारी सुनिश्चित हो? *---- अगर महिलाओं के नाम जमीन हो जाए, तो आपके हिसाब से उनकी ज़िंदगी में क्या-क्या बदल सकता है?”

क्या आपके गाँव या मोहल्ले में किसी महिला ने अपने नाम पर जमीन या घर के कागज़ बनवाने की कोशिश की है? क्या उसका जीवन बदला? क्या परिवार का व्यवहार बदला? क्या बेटियों और बहुओं का नाम जमीन और घर के कागज़ में होना चाहिए? कैसे परिवार मजबूत होगा? आपकी राय भले ही पक्ष में हो विपक्ष में अपनी राय जरूर रिकार्ड करें। राय रिकॉर्ड करने के लिए अपने फोन से 3 नंबर का बटन दबाएँ या मोबाइल वाणी ऐप में लाल बटन दबाकर अपनी बात रिकॉर्ड करें।

दोस्तों, महिलाओं के भूमि अधिकार सुरक्षित करने में स्थानीय शासन की भूमिका केंद्रीय है। यदि ग्राम पंचायतें भूमि अधिकार को प्राथमिकता दें, महिलाओं को लाभार्थी सूचियों में शामिल करें, अधिकारियों को प्रशिक्षण दें और समुदाय संगठनों के साथ मिलकर काम करें, तो ग्रामीण भारत में महिलाओं का सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण संभव है। स्पष्ट है कि जमीन पर अधिकार सिर्फ कागज़ी नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान और स्वतंत्रता का सवाल है — और इसका समाधान गांव से ही शुरू होगा। तब तक आप हमें बताइए कि , *--- आपके परिवार में जमीन किसके नाम है? क्या महिलाओं का नाम भी उसमें शामिल है *--- क्या आपकी पंचायत ने कभी महिलाओं को जमीन के अधिकार के बारे में कोई जानकारी या बैठक रखी है? अगर हाँ, तो उसका असर क्या रहा?” *--- अगर महिलाओं के नाम जमीन हो जाए, तो आपके हिसाब से उनकी ज़िंदगी में क्या-क्या बदल सकता है?”